स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने कहा कि आईजीएमसी में रेजिडेंट चिकित्सकों की कमी को दूर किया जाएगा। इसके लिए प्रदेश सरकार पीजी करने वाले चिकित्सकों पर लगाई दो साल पेराफेरी अस्पतालों में सेवाएं देने की शर्त को हटाने पर विचार कर रही है। आईजीएमसी की रोगी कल्याण समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री ने कहा कि इससे रेजिडेंट डॉक्टरों के पद भरे जा सकेंगे। इससे आईजीएमसी की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार आएगा।
पेराफेरी शर्त के तहत पीजी करने वाले डॉक्टरों को दो साल के लिए फील्ड में सेवाएं देना अनिवार्य किया गया है। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि मंडी के ईएसआई मेडिकल कॉलेज को अब प्रदेश सरकार स्वयं संचालित करेगी। इस पर कुल 944 करोड़ में से करीब 600 करोड़ खर्च किया जा चुका है। इसे चलाने की केंद्र सरकार ने अनुमति दे दी है, प्रदेश सरकार ने इसके लिए एमसीआई से मंजूरी को आवेदन किया है।
स्वास्थ्य मंत्री ने आईजीएमसी में अलग से आपातकालीन मेडिकल विभाग स्थापित करने की घोषणा भी की। इसके लिए उन्होंने अस्पताल व कॉलेज प्रशासन को प्रस्ताव तैयार कर सरकार को भेजने के निर्देश दिए। बैठक में नगर निगम शिमला के मेयर संजय चौहान ने अस्पताल परिसर में दवाइयों की दुकानों के आवंटन की प्रक्रिया को लेकर सुझाव दिए।
बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव विनीत चौधरी ने आरकेएस की कार्य प्रणाली में सुधार लाने पर बल दिया। वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक आईजीएमसी डा. रमेश चंद ने कार्यवाही का संचालन किया। आईजीएमसी प्राचार्य प्रो. एसएस कौशल ने अस्पताल, कॉलेज से संबंधित विभिन्न मामलों की जानकारी दी।
तीन साल में बनकर तैयार होगा नया ब्लाक- स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि 36 माह के भीतर आईजीएमसी का ओपीडी ब्लॉक बनकर तैयार हो जाएगा। केंद्र की स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के तहत मंजूर 150 करोड़ के सुपर स्पेशियेलिटी ब्लॉक का निर्माण किया जाएगा। इसमें केंद्र और राज्य 120:30 करोड़ खर्च करेगा। केंद्र की पिछली सरकार के कार्यकाल में प्रदेश को तीन मेडिकल कॉलेज मंजूर हुए हैं। इन्हें नाहन, चंबा और हमीरपुर में स्थापित किया जाएगा।
विधायक ने उठाई कर्मचारियों की मांगे- आरकेएस गवर्निंग बॉडी की बैठक में शिमला शहर के विधायक सुरेश भारद्वाज ने अस्पताल में आपातकालीन सेवाओं को सुधारने, कर्मचारियों की मांगों के प्रति सहानुभूति पूर्वक विचार करने का मामला उठाया। इस पर स्वास्थ्य मंत्री ने ऐसे कर्मचारियों का पूरा ब्यौरा मांगा और इस पर विचार करने का भरोसा दिया।