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Shimla News: चौड़ा मैदान पुस्तकालय में जमीन पर बैठकर होती है पढ़ाई

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पुस्तकालय में पुरानी परंपरा को रखा है कायम, भीतर प्रवेश के लिए पहनने पड़ती है जूट से निर्मित पट्टिकाएं
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पुस्तकालय में 15 हजार पुस्तकें रखी हैं सुरक्षि
हर्षित शर्मा
शिमला। राजधानी के चौड़ा मैदान स्थित पुस्तकालय अपनी कार्यप्रणाली और संरचना के कारण सामान्य पुस्तकालयों से अलग पहचान बना रहा है। यहां पाठकों को केवल पुस्तकें ही नहीं मिलतीं बल्कि अध्ययन की वह पद्धति भी अपनानी पड़ती है, जो प्राचीन भारतीय और बौद्ध शिक्षा प्रणालियों से जुड़ी है।

पुस्तकालय में प्रवेश से पहले आगंतुकों को जूते बाहर उतारने होते हैं। भीतर जाने के लिए जूट से निर्मित विशेष पट्टिकाएं पहननी पड़ती हैं। पुस्तकालय से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि यह व्यवस्था ज्ञान स्थल की पवित्रता बनाए रखने के उद्देश्य से की गई है। इस कारण यहां प्रवेश करते ही बाहरी वातावरण से अलग एक शांत माहौल बन जाता है। अध्ययन के लिए पुस्तकालय में कुर्सी और मेज की सुविधा उपलब्ध नहीं है। पाठकों को लकड़ी से बनीं चौखटों पर बैठकर अध्ययन करना होता है। अधिकारियों के अनुसार यह व्यवस्था लंबे समय तक एकाग्रता बनाए रखने में सहायक होती है। मौन और अनुशासन का पालन यहां अनिवार्य है।
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पुस्तकालय की इमारत पूरी तरह लकड़ी से तैयार की गई है। इसके द्वारों और भीतरी हिस्सों में बौद्ध परंपरा से जुड़े प्रतीक, पुष्प आकृतियां और पारंपरिक शिल्प दिखाई देते हैं। यह कार्य किन्नौर क्षेत्र के कारीगरों द्वारा किया गया है। यहां उपलब्ध पुस्तक संग्रह भी इसे अलग बनाता है। पुस्तकालय में करीब 15 हजार पुस्तकें सुरक्षित रखी हैं। इनमें भारतीय कला, इतिहास और संस्कृति के साथ विदेशी कलाओं पर आधारित संदर्भ ग्रंथ शामिल हैं। संग्रह में रूस, यूनान, चीन और जापान की कला पर केंद्रित सामग्री भी मौजूद है, जिसका उपयोग शोधार्थी करते हैं। पुस्तकालय का निर्माण कार्य वर्ष 2012 में शुरू होकर 2014 में पूरा हुआ। भवन के द्वारों पर बौद्ध संस्कृति से जुड़े आठ प्रमुख प्रतीक उकेरे गए हैं। आंतरिक संरचना को शांत और अध्ययन-अनुकूल बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया है। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार पुस्तकालय का उद्देश्य ऐसा वातावरण उपलब्ध करवाना है जहां पाठक बिना किसी व्यवधान के अध्ययन कर सकें।
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संविधान की हस्तलिखित प्रति भी है सुरक्षित
राज्य संग्रहालय के अधिकारी हरि सिंह चौहान ने बताया कि प्रदेश में इस तरह का समग्र कला-संग्रह सीमित स्थानों पर ही उपलब्ध है।
पुस्तकालय में भारतीय संविधान की एक हस्तलिखित प्रति भी सुरक्षित रखी है। यह प्रति संविधान निर्माण के समय तैयार किए मूल सुलेख का हिस्सा है। लगभग 500 पृष्ठों वाले इस दस्तावेज को मिलबॉर्न लोन कागज पर लिखा है। वर्ष 1954 में पूर्ण हुए संविधान की जिल्द काले रंग की है और उस पर सुनहरे अक्षरों में शीर्षक अंकित है। भीतर के पृष्ठों पर सुनहरी सीमाओं के बीच संविधान का पाठ और संविधान सभा के सदस्यों के हस्ताक्षर दर्ज हैं।
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