लोगों में जागरूकता पैदा की जाएगी। सबसे पहले परिवहन निगम के चालक-परिचालक उसके बाद टैक्सी चालक और स्कूली विद्यार्थी अभियान में शामिल किए जाएंगे। पठानिया ने बताया कि मास्टर ट्रेनर और नोडल अधिकारी भी तैनात किए जाएंगे। इसके बाद आम लोगों को रोड सेफ्टी के लिए जागरूक किया जाएगा। सभी एनजीओ, युवक मंडल और महिला मंडलों को अभियान में शामिल किया जाएगा। सड़क सुरक्षा सेल का गठन भी किया गया है।
हिमाचल सड़क दुर्घटनाओं में अन्य राज्यों की अपेक्षा पहले स्थान पर है। प्रदेश में हर साल तीन हजार दुर्घटनाएं होती हैं। इनमें 12 सौ लोगों की जान जाती है। 95 फीसदी सड़क हादसे मानवीय भूल के कारण होते हैं। ड्रिंक एंड ड्रंक ड्राइविंग, मोबाइल सुनना, म्यूजिक सिस्टम, ओवर स्पीड और सीट बेल्ट न बांधना हादसों का मुख्य कारण होता है।