जम्मू-कश्मीर में फैली हिंसा के बीच डल झील के आसपास रविवार शाम को आठ बजे नकाबपोश लोगों ने पथराव कर दिया। इस बीच, वहां मौजूद हिमाचल के लोगों ने भागकर अपनी जान बचाई। बड़ी मुश्किल से वे होटल में पहुंचे। डल झील पर मौजूद बद्दी निवासी सेवादल प्रमुख सुरेंद्र रघुवंशी, संजीव बस्सी, पंचायत उपप्रधान हितेंद्र सोनू, सुरेंद्र चौधरी, राजेंद्र कीकू और कांग्रेस एससी सेल के प्रदेश
महासचिव अच्छर पाल कौशल ने बताया कि वे अमरनाथ यात्रा रोके जाने से डल झील के किनारे ही होटल में रुके हैं। रविवार शाम को झील किनारे टहलने गए थे। इस दौरान कुछ नकाबपोश युवकों ने पथराव कर दिया। वे वाहनों पर भी पत्थर और डंडे चला रहे थे। माहौल बिगड़ता देख वे होटल की ओर भागे। हिमाचल के निवासियों ने दूरभाष पर बताया कि 35 वर्षों में पहली बार डल झील पर
स्थिति इतनी तनावपूर्ण हुई है। कहा कि बाजार बंद हो रहे हैं। ऐसे में एटीएम और मेडिकल स्टोर जैसी आवश्यक सुविधाओं के लिए भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दून के विधायक रामकुमार चौधरी भी जिला परिषद अध्यक्ष धर्मपाल चौधरी, हरिओम और कुछ अन्य नजदीकी लोगों के साथ डल किनारे रुके हैं।
विधायक रामकुमार ने कहा कि पहले वह पहलगांव की ओर से अमरनाथ यात्रा पर निकल रहे थे। अब हिंसक घटनाओं से उनका दल बालटाल से अमरनाथ जाएगा। स्थानीय प्रशासन ने अभी यात्रा के लिए हरी झंडी नहीं दी है। श्रीनगर में स्थिति इतनी तनावपूर्ण नहीं है। संभावना है कि यात्रा जल्द शुरू होगी।
ऑपरेशन बालटाल ने निकाले श्रद्धालु
बालटाल में फंसे सात हजार श्रद्धालुओं को सेना ने रात को 10 बजे ऑपरेशन बालटाल चलाकर रामबाण तक सुरक्षित पहुंचाया। इनमें पांच सौ से अधिक हिमाचली भी शामिल थे।
इसके बाद श्रद्धालु आसानी से अपने घर का रुख कर सकते हैं। बालटाल में मौजूद शिव गौरी सिद्ध सेवा मंडल अध्यक्ष राम लोक चौधरी ने बताया कि बालटाल से रविवार को सभी श्रद्धालुओं को दर्शनों के उपरांत निकाला जा चुका है। सेना पूरी सतर्कता से कार्य कर रही है।