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आंगनबाड़ी कर्मचारियों की मांगों और मजदूर विरोधी नीतियों पर हल्ला बोल

Tue, 12 Jul 2016 09:31 AM IST
ब्यूरो, सोलन
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एटक और सीटू के बैनर तले सोलन शहर में प्रदेश सरकार की नीतियों को मजदूर विरोधी करार देते हुए आंगनबाड़ी और निगम वर्करों के हक को लेकर दोनों संगठनों के कार्यकर्ताओं ने हल्ला बोला। - फोटो : अमर उजाला
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एटक और सीटू के बैनर तले सोलन शहर में प्रदेश सरकार की नीतियों को मजदूर विरोधी करार देते हुए आंगनबाड़ी और निगम वर्करों के हक को लेकर दोनों संगठनों के कार्यकर्ताओं ने हल्ला बोला। चिल्ड्रन पार्क में एकत्र होने के बाद मांगों को लेकर उपायुक्त कार्यालय के बाहर तक रैली निकाली और बाद में प्रदर्शन करते हुए सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए नारेबाजी की गई।
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वक्ताओं ने कहा कि एक तरफ सरकार मजदूरों के हक की बात कह रही है तो दूसरी ओर शौंग टौंग के प्रदर्शन को कुचलने के लिए सरकार हर घटिया हथकंडे अपनाने तो उतारू है। प्रदेश में बिगड़ी कानून व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए प्रदेश सरकार को आड़े हाथों लिया। इसके अलावा परिवहन निगम के कर्मियों के समर्थन में भी आवाज बुलंद की। इस मौके पर गणेशम कौशल, निर्मल कौर, सर्वथ देवी, सुमन, सविता, प्यारे लाल वर्मा, अजय भट्टी, डीसी रावत, रूपचंद ठाकुर, प्रेम चंदेल और एनडी रनौट आदि मौजूद रहे।

शौंगटौंग का मुद्दा खूब गूंजा
एटक के बैनर तले  शौंगटौंग विद्युत परियोजना में पनपे मजदूरों के विरोध को कुचलने को लेकर प्रदेश सरकार पर संगीन आरोप लगाते हुए उपायुक्त कार्यालय के बाहर प्रदर्शन और नारेबाजी की गई। कामरेड जगदीश चंद की अगुवाई में रैली चिल्ड्रन पार्क से निकाली गई। डीसी चौक के समीप हाथों में बैनर लिए प्रदर्शन किया गया। आरोप लगाए कि सरकार के इशारे पर मजदूर आंदोलन का दमन करने की कोशिश की जा रही है। न्यूनतम मजदूरी, समय पर वेतन, पीएफ सुविधा, छुट्टियों की मांग दरकिनार हो रही है। श्रम कानूनों को लागू करने की बजाय परियोजना के 10 किमी की परिधि में पिछले चार माह से धारा 144 लगा कर मजदूरों पर झूठे मुकदमे बनाने, लाठियां भांजने में लगी है। प्रबंधकों ने श्रम कानूनों को लागू करने की मांग कर रहे मजदूरों में 116 को गैर कानूनी तरीके से निष्कासित कर दिया है।
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आंगनबाड़ी वर्करों को दो पेंशन ग्रेच्युटी
सीटू के बैनर तले  सरकार की कार्यशैली को मजदूर विरोधी करार देते हुए रैली निकाली गई। वर्ष 2015 में आंगनबाड़ी कर्मचारियों का मानदेय बढ़ाने की घोषणा पर अमल न होने पर रोष जताया गया। वक्ताओं ने कहा कि पेंशन, ग्रेच्युटी, न्यूनतम वेतन आदि की कोई सुविधा नहीं मिल रही है। इन कर्मियों को कम से कम 7000 रुपये पगार की मांग उठाई गई। नियमितिकरण, डेढ़ लाख तक की एक मुश्त ग्रेच्युटी और पीएफ की सुविधा मांगी गई। हिमाचल पथ परिवहन निगम के कर्मियों तथा सेवानिवृत्त कर्मचारियों के साथ सरकार के भाव को अन्यायपूर्ण करार देते हुए संबंधित मांगों को मानने की मांग उठाई गई। विवि में रूसा के खिलाफ लड़ रहे विद्यार्थियों की मांगें मानने के लिए भी सरकार से गुहार लगाई गई।
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