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कैंसर से पीड़ित मरीजों के लिए उम्मीद की नई किरण, इस जैल से होगा उपचार

Thu, 06 Jun 2019 01:48 PM IST
अरविन्द ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सोलन
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- फोटो : अमर उजाला
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आंत और पेट का कैंसर अब जटिल नहीं रहेगा। एक जैल के माध्यम से इस रोग का उपचार किया जा सकेगा। जैल में दवा रहेगी, जिसका पीएच परिवर्तन के अनुसार खुद ही रिसाव होता रहेगा। ट्यूमर के बढ़ने की स्थिति में दवा निरंतर रिलीज होती रहेगी।

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तर्क दिया जा रहा है कि ट्यूमर के बढ़ने पर दवा रिलीज नहीं हो पाती है, जिससे पीएच परिवर्तन नहीं होता है। शूलिनी विश्वविद्यालय में स्मार्ट एंटी-कैंसर नैनोगेल जैल का एक अनंतिम पेटेंट चेतना वर्मा, डॉ. पूनम नेगी और डॉ. दीपक पठानिया ने बताया कि पिछले साल 21 नवंबर को प्रयास शुरू किए थे, जो अब सिरे चढ़े हैं।

शोध से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि उनकी लंबी मेहनत का नतीजा है जो दुनिया भर में कैंसर से पीड़ित मरीजों के लिए उम्मीद की एक किरण साबित होगी। विश्व कैंसर अनुसंधान कोष के 2018 के आंकड़ों के अनुसार, कोलोरेक्टल कैंसर यानी पेट या मलाशय का कैंसर 2018 में दुनिया भर में तीसरा सबसे आम कैंसर है, जिसमें 18 लाख से अधिक नए मामले हैं। कैंसर विरोधी दवाओं में से अधिकांश विषाक्त हैं। एक विशेष स्तर से परे उच्च खुराक संभव नहीं है।

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- फोटो : अमर उजाला
परिणामस्वरूप, रोगी का उपचार धीमा हो जाता है। इसके अलावा, कीमोथैरेपी में गैर-लक्षित दवा वितरण के कारण शरीर में दवाओं का अंधाधुंध वितरण अभी भी बीमारी के लिए मौजूदा उपचारों की एक और सीमा है।

शोध का नेतृत्व कर रहीं डॉ पूनम नेगी ने कहा कि एंटीसेंसर दवा वितरण प्रणाली का ढेर मौजूद हैं, जिसने स्वस्थ ऊतकों और ठोस ट्यूमर के बीच मौजूद पीएच के मामूली अंतर का फायदा उठाया है।

इस शोध में स्कूल ऑफ फार्मास्युटिकल साइंसेज में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. पूनम नेगी, पीएचडी छात्रा चेतना, जम्मू-कश्मीर से डॉ. दीपक पठानिया, प्रो. भुवनेश गुप्ता शामिल हैं।

दुनिया को बड़े खतरे से बचाने में मिलेगी मदद 
कैंसर सबसे जटिल बीमारियों में से एक है और दुनिया भर में मानव जीवन के लिए बड़ा खतरा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की नवीनतम रिपोर्टों के अनुसार 2030 तक वैश्विक कैंसर मृत्यु दर 45 प्रतिशत से बढ़कर 70 प्रतिशत होने की आशंका है।

कैंसर का सटीक कारण अभी भी एक रहस्य बना हुआ है, जबकि दुनिया भर के डॉक्टर और शोधकर्ता इसके इलाज को खोजने और मौजूदा तरीकों और उपचारों को बेहतर बनाने के लिए प्रयास कर रहे हैं।
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