15 घंटे के सर्च ऑपरेशन के बावजूद ब्यास नदी में बहे एक टूअर गाइड सहित 21 इंजीनियरिंग छात्रों का अभी भी कोई सुराग नहीं मिल पाया है। ऑपरेशन में जुटे करीब 400 जवानों ने नदी कि किनारों से लेकर संभावित स्थानों पर छात्रों को तलाशा।
लेकिन उनके हाथ शुरूआती सफलता के बाद निराशा ही हाथ लगी। वहीं अपने बच्चों की झलक पाने को परिजनों की निगाहों में अभी भी आस बंधी हुई है।
20 किलोमीटर के दायरे में ही चलेगा सर्च ऑपरेशन
पंडोह डैम में ट्रैप लगाया है ताकि बहकर यहां क पहुंचे शव आगे ना जा सकें। इस ट्रैप में फंसने वाली हर संदिग्ध चीज की भी पड़ताल की जा रही है।
छात्रों की तलाश में लगे बचाव दल के अनुसार सर्च ऑपरेशन मंगलवार को भी सुबह से शुरू होगा और इसका दायरा 20 किलोमीटर का ही रहेगा।
इसमें किनारों की दोबारा छानबीन की जाएगी। बचाव दल भी मंगलवार को नई उम्मीद के साथ ऑपरेशन शुरू करेगा।
क्या सिल्ट में दब गई जिंदगियां!
नदी में बचाव में जुटे बचाव दलों के अधिकारियों का कहना है कि जब पानी के तेज बहाव में इंजीनियरिंग छात्र आए तो पानी के साथ साथ बड़ी मात्रा में सिल्ट भी आई थी।
ऐसे में आशंका है कि ज्यादातर शव बहने के दौरान सिल्ट में दब गए होंगे। अब प्रशासन के पास सिल्ट के हटने का इंतजार करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है। ऐसे में सर्च ऑपरेशन आने वाले चार से पांच दिनों तक जारी रहेगा।
बुलाए गए गोताखोर
मंगलवार को पुख्ता ढंग से सर्च ऑपरेशन के लिए गोताखोरों को बुलाया जाएगा। हालांकि सोमवार को भी 15 राफ्टरों के साथ और गोताखोर पानी में उतरे थे। इससे पूर्व हुए हादसो में भी देखा गया है कि शवों को मिलने में दो से तीन दिन का समय लग जाता है।
ऐसे में शव पानी से फूलने के कारण नदी में ऊपर आ जाते हैं या फिर किनारों पर लग जाते हैं। इसको देखते हुए मंगलवार को भी नदी के किनारों को भी एक बार फिर खंगाला जाएगा।