बंदर नसबंदी केंद्र ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दी हैं। यहां मादा बंदरों का गर्भ जांचने के लिए अल्ट्रासाउंड आदि का कोई इंतजाम नहीं है। मादा बंदरों को नसबंदी के नाम पर एनेस्थीसिया देकर उनके पेट की चीर फाड़ की जा रही है।
पेट चीरने के बाद अगर उन्हें मादा बंदर के गर्भवती होने का पता चलता है तो वे दोबारा पेट सिल कर उन्हें छोड़ देते हैं। भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड की चार सदस्यीय टीम ने हाल में ही शिमला केंद्र के औचक निरीक्षण कर यह दिल दहलाने वाली रिपोर्ट तैयार की है।
बोर्ड ने प्रदेश सरकार से सिफारिश की है कि वे हिमाचल के छह केंद्रों में चल रहे बंदर नसबंदी कार्यक्रम को तुरंत बंद कर दें। बोर्ड ने अपनी जांच रिपोर्ट मुख्य सचिव और इंस्पेक्टर जनरल ऑफ फॉरेस्ट (वन्यजीव) को भेजी है।