मार्च 1952 में डॉ. परमार ने इस प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की और अपने तीन सदस्यीय मंत्रिमंडल का गठन किया। जुलाई 1954 में बिलासपुर को हिमाचल में मिलाकर इसे प्रदेश का पांचवां जिला बनाया गया। 1956 में ‘स्टेट्स रिआर्गेनाइजेशन एक्ट’ लागू होने के बाद 31 अक्तूबर 1956 को हिमाचल प्रदेश विधानसभा समाप्त करके उसकी जगह यहां टेरिटोरियल काउंसिल बना दी गई। पहली नवंबर, 1956 को हिमाचल प्रदेश केंद्र शासित राज्य बना। वर्ष 1963 में ‘गवर्नमेंट ऑफ यूनियन टेरिटोरीज एक्ट’ पास करके पहली जुलाई 1963 को टेरिटोरियल काउंसिल को हिमाचल प्रदेश विधानसभा में परिवर्तित किया गया। परिणामस्वरूप डॉ. वाईएस परमार दूसरी बार मुख्यमंत्री बने।
सन 1966: ‘पंजाब स्टेट्स पुनर्गठन एक्ट’ पास किया गया और कांगड़ा, ऊना, हमीरपुर, कुल्लू, लाहौल-स्पीति, शिमला, नालागढ़, कंडाघाट, डलहौजी आदि क्षेत्र हिमाचल में शामिल किए गए। इससे हिमाचल का क्षेत्रफल 55,673 वर्ग किलोमीटर हो गया। इसके बाद भौगोलिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और भाषायी पुनर्मिलन तो हो गया लेकिन इस प्रदेश के लिए पूर्ण राज्य का दर्जा मिलना अभी शेष था।
दिसंबर 1970 : संसद ने ‘स्टेट ऑफ हिमाचल प्रदेश एक्ट-1970 पास किया
25 जनवरी 1971 : तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने स्वयं शिमला आकर यहां के ऐतिहासिक रिज मैदान में एकत्रित हजारों हिमाचलवासियों के बीच हिमाचल को पूर्ण राज्य प्रदान करने की घोषणा की। जब यह घोषणा की गई तो रिज मैदान पर बर्फ की फाहें गिर रही थीं। इस तरह हिमाचल प्रदेश भारत का 18वां राज्य बन गया। उस वक्त लेडीज पार्क में आग जलाई गई। बर्फ के बीच में ही खुशी-खुशी नाटियों पर नृत्य हुआ था। तब से हर वर्ष 25 जनवरी को यह दिवस मनाया जाता है।