स्टेट फोरेंसिक साइंस लैब जुन्गा में फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट चायल में ट्रेनिंग कर रहे फॉरेस्ट रेंजरों और गार्ड को वाइल्ड लाइफ क्राइम और फोरेंसिक वाइल्ड लाइफ विषयों पर जानकारी दी गई। कार्यशाला के दौरान 10 फॉरेस्ट रेंजरों और 14 फॉरेस्ट गार्डों ने भाग लिया।
विषय विशेषज्ञ डॉक्टरों ने अधिकारियों को वाइल्ड लाइफ क्राइम, फोरेंसिक वाइल्ड लाइफ के अलावा साइबर क्राइम, डीएनए, एक्सप्लोसिव, डॉक्यूमेंटेशन, फोरेंसिक लैब के सामान्य कार्य के बारे में बताया। लैब विजिट भी करवाया। लैब के निदेशक डा. अरुण शर्मा ने वाइल्ड लाइफ क्राइम और फोरेंसिक वाइल्ड लाइफ विषय पर जानकारी दी।
उन्होंने वाइल्ड लाइफ क्राइम की गुत्थी सुलझाने को इस्तेमाल की जाने वाली आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी। कहा कि आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल से जांच अधिकारी तुरंत पता लगा सकते हैं कि जंगली जानवरों को किन हथियारों और तरीकों से मारा गया और उनकी आयु कितनी है।
लैब के सहायक निदेशक डीएनए डा. विवेक सहजपाल ने वाइल्ड लाइफ के डीएनए को सुरक्षित रखकर इनके माध्यम से मामलों को सुलझाने और इसकी महत्ता के बारे में बताया। वैज्ञानिक अधिकारी नसीब पटियाल सहित अन्य वैज्ञानिकों ने भी अपने वन अधिकारियों को वाइल्ड लाइफ क्राइम के बारे में बताया।