नई शिक्षा नीति-2020 के प्रावधानों के तहत हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला और सरदार पटेल विश्वविद्यालय मंडी से संबद्ध महाविद्यालयों को धीरे-धीरे ‘स्वायत्त संस्थान’ का दर्जा मिलेगा। शिक्षा क्षेत्र के प्रतिष्ठित संस्थानों आईआईटी और आईआईएम की तर्ज पर ये स्वायत्त संस्थान पाठ्यक्रम निर्धारण से लेकर डिग्री तक खुद जारी कर सकेंगे। शुरुआती दौर में धर्मशाला कॉलेज सहित मंडी, चंबा और अन्य जिला मुख्यालयों में चल रहे बड़े कॉलेज स्वायत्त संस्थान का दर्जा हासिल कर सकेंगे। इस व्यवस्था को लागू करते समय कुछ मापदंड निर्धारित किए जाएंगे। इनके तहत संबंधित कॉलेज की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, छात्र-स्टाफ संख्या, ढांचागत सुविधाएं, नैक रैंकिंग आदि शामिल रहेगा। जो महाविद्यालय इन मापदंडों को पूरा करेगा, वह स्वायत्त संस्थान के रूप में मान्यता हासिल करने के लिए आवेदन कर सकेगा।
आवेदन के गहन मूल्यांकन के बाद ही किसी कॉलेज को स्वायत्त संस्थान के रूप में मान्यता मिल सकेगी। इसके बाद ये स्वायत्त संस्थान आईआईटी और आईआईएम जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों की ही तरह स्वायत्त रूप से खुद का संचालन करने के लिए अधिकृत होंगे। सरदार पटेल विश्वविद्यालय मंडी के कुलपति डॉ. देवदत्त शर्मा ने बताया कि नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन के साथ धर्मशाला, चंबा, मंडी सहित अन्य बड़े कॉलेज स्वायत्त संस्थान बनने के लिए सक्षम होंगे। धर्मशाला कॉलेज की ही बात करें तो यह संस्थान करीब सौ साल से चल रहा है। महाविद्यालय के पास सुदृढ़ ढांचागत सुविधाएं उपलब्ध हैं। छात्र और स्टाफ संख्या भी यहां पर्याप्त रही है। ऐसे में स्वायत्त संस्थान बनने के लिए यह महाविद्यालय पात्रता के काफी नजदीक होगा। इससे शिक्षण संस्थानों के बेहतर प्रबंधन के साथ-साथ पहले से और ज्यादा जवाबदेह व्यवस्था विकसित होगी। संवाद
तीन तरह के होंगे शैक्षणिक संस्थान
डॉ. देवदत्त शर्मा ने बताया कि नई शिक्षा नीति के तहत तीन तहत शिक्षण संस्थानों की तीन श्रेणियां होंगी। पहले, शोध विश्वविद्यालय होंगे जो शिक्षण से ज्यादा शोध पर केंद्रित होंगे। दूसरे, अध्यापन विश्वविद्यालय होंगे जो मुख्य तौर पर शिक्षण पर ध्यान देंगे। तीसरे स्वायत्त संस्थान होंगे। कोई भी स्वायत्त संस्थान बेहतर प्रदर्शन के आधार पर शोध या अध्यापन विश्वविद्यालय के रूप में मान्यता हासिल कर सकेंगे।