राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा कि प्रदेश में स्कूलों, आश्रमों, बालबाड़ी और शिशु गृह जैसे विभिन्न संस्थाओं के माध्यम से कार्यान्वित की जा रही जनकल्याण गतिविधियों को बढ़ावा देने वाले समाजसेवक लोगों को परिषद से जोड़ने की जरूरत है। देवव्रत शुक्रवार को राजभवन में राज्य बाल विकास परिषद की गवर्निंग बॉडी की वार्षिक बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह भी मौजूद रहे।
देवव्रत ने इस दौरान उपायुक्तों द्वारा जिला स्तर पर स्थानीय समितियां गठित करने और कार्य में तेजी लाने के साथ साथ सेवान्मुखी वालंटियर की स्थानीय समितियां गठित करने की बात कही। राज्यपाल ने कहा कि मंदिर लोक आस्था का केंद्र हैं तथा लोगों को जीवन के सही पथ का अनुसरण करने को प्रेरित करते हैं।
इसलिए मंदिरों को स्वयं को परोपकारी गतिविधियों में सम्मिलित करना चाहिए और धन एवं संसाधनों के साथ संस्थानों की सहायता के लिए आगे आना चाहिए। आचार्य देवव्रत ने अधिकारियों को सभी संस्थानों में नियमित निरीक्षण करने के अतिरिक्त आश्रम में रह रहे बच्चों एवं अन्य व्यक्तियों से बातचीत करने के निर्देश दिए। उन्होंने परिषद की बैठक को नियमित अंतराल पर आयोजित करने की बात कही।