मौके पर ही वाहन मालिक को रजिस्ट्रेशन फीस जमा करवानी होगी। इसके अलावा टैक्स भी शोरूम में ही अदा करना होगा। उपभोक्ता इसका भुगतान क्रेडिट और डेबिट कार्ड से कर सकेंगे। वाहन पोर्टल पर पंजीकरण करने के लिए डीलरों को लॉगइन और पासवर्ड दिए जाएंगे।
डीलर को अलॉट की गई गाडि़यों के नंबर की सीरीज से ही वाहनों को नंबर जारी होंगे। अगर कोई वाहन मालिक अपनी पसंद का नंबर लेना चाहता है तो उसे मौके पर ही उसके लिए अतिरिक्त फीस देनी होगी। वाहन मालिक से लिए गए दस्तावेजों को 72 घंटे के भीतर डीलर को ऑनलाइन ही रजिस्ट्रेशन अथॉरिटी को भेजना होगा। मंजूरी मिलते ही गाड़ी को नंबर जारी होगा।
- हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगाने की जिम्मेदारी भी डीलरों की होगी।
- वाहनों में नंबर प्लेट के स्थान पर एप्लाइड फॉर लिखने की व्यवस्था होगी खत्म।
हादसा हो जाने पर बीमा शर्तों के अनुसार बिना रजिस्ट्रेशन वाली गाडि़यों के मालिकों को बीमा क्लेम नहीं मिलता है। तकनीकी कारणों के चलते यह समस्या पेश आती है। बिना रजिस्ट्रेशन और नंबर प्लेट के गाड़ी चलाना अपराध भी है।