डॉ. वाईएस परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी के वैज्ञानिक डॉ. एसके भारद्वाज ने बताया कि हिमाचल में सेब की परंपरागत किस्तें रॉयल और गोल्डन हैं। पहले ये किस्में 1200 से 1500 मीटर ऊंचाई तक हो जाती थीं। अब 1500 मीटर से ऊपर हो रही हैं।
अब 1800-1900 मीटर की ऊंचाई वाला क्षेत्र इसके लिए मार्जिनल एरिया हो गया है। सेब की इस किस्म की बेल्ट 2400-2500 मीटर ऊपर चली गई हैं। हालांकि, निचले क्षेत्रों में सेब बागवान अब लो चिलिंग किस्में लगा रहे हैं।
ये काफी नीचे तक यानी हमीरपुर, बिलासपुर तक उगने लगी हैं। मगर स्टैंडर्ड किस्मेें तो ऊपर की ओर ही सरक रही हैं। यही स्थिति रही तो आने वाले वक्त में इनके अस्तित्व पर संकट खड़ा हो जाएगा। हालांकि, दूसरी ओर सांगला से छितकुल तक बर्फ से कवर कुछ एरिया ओपन हो गए हैं।
वहां सेब के बगीचे लग गए हैं। यहां स्टैंडर्ड किस्में उग रही हैं। यह सब जलवायु परिवर्तन का असर है। आने वाले वक्त में हमारे किसानों-बागवानों को फसलों-फलों की अल्टरनेट किस्में भी उगानी होंगी। किसान ऐसी तमाम किस्मों को अडॉप्ट भी कर रहे हैं।