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शिमला: सेंट एडवर्ड स्कूल ने पूर्व विद्यार्थी जनरल बिपिन रावत को नम आंखों से दी विदाई

Fri, 10 Dec 2021 06:27 PM IST
अरविन्द ठाकुर अमर उजाला ब्यूरो, शिमला

सार

स्कूल के प्रधानाचार्य फादर अनिल स्कवेरा ने कहा कि यह देश के लिए बड़ा नुकसान है। एडवर्ड स्कूल ने अपना एक ऐसा पूर्व छात्र खोया है, जिस पर हमें गर्व है। 
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श्रद्धांजलि देते छात्र। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हेलिकॉप्टर दुर्घटना में देश के पहले सीडीएस जनरल बिपिन रावत, उनकी धर्मपत्नी मधुलिका रावत सहित मारे गए ग्यारह जवानों की आत्मा की शांति के लिए सेंट एडवर्ड स्कूल में शुक्रवार को प्रार्थना सभा करवाई और नम आंखों से सभी को विदाई दी गई। इसमें स्कूल के प्रधानाचार्य फादर अनिल स्कवेरा और स्टाफ ने मोमबत्तियां जलाकर बिपिन रावत को याद किया। प्रार्थना सभा में जनरल रावत के तीन सहपाठी विशेष रूप से शरीक हुए। 

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करीब एक घंटे तक हुई इस प्रार्थना सभा में स्कूल के सदनों के कैप्टनों ने भी जनरल रावत को याद किया। भक्ति संगीत के साथ हुई प्रार्थना सभा में टीवी शो में अमिताभ के साथ नजर आए स्कूल के छात्र अरुणोदय ने भक्ति गीत गाया। प्रधानाचार्य फादर अनिल स्कवेरा ने कहा कि यह देश के लिए बड़ा नुकसान है। एडवर्ड स्कूल ने अपना एक ऐसा पूर्व छात्र खोया है, जिस पर हमें गर्व है। 

उन्होंने कहा कि जनरल रावत ने स्कूल के फॉलो द लाइन मोटो को चरितार्थ किया है। 13 मई 2019 को जनरल रावत के स्कूल दौरे के दौरान उनसे मिले स्कूल के तत्कालीन कैप्टन अधिश्रेय शकतान ने बताया कि जनरल रावत के लिए यह मायने नहीं रखता कि आप लेफ्टिनेंट हैं या फिर जनरल। उनके लिए यह मायने रखता है कि आपके कंधों का रैंक आपके सिर पर हावी न हो। एनसीसी छात्र निश्रय चौहान ने कहा कि जनरल रावत की सादगी भरे स्वभाव से वे प्रभावित हुए थे, इतने बड़े पद पर होने के बावजूद उनमें एक अलग सादगी और अपनापन महसूस हुआ था। 
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सहपाठी बोले, रावत को था सेना में जाने का जुनून 
प्रार्थना सभा में आए स्व. बिपिन रावत के सहपाठी चेतन शर्मा ने जनरल रावत के साथ के बिताए दिनों को याद करते हुए बताया कि जनरल रावत का लक्ष्य तय था, वे बस यही कहते थे कि फौज ज्वाइन करनी है, उनके पिता भी आर्मी में उस समय ब्रिगेडियर थे। इसका दुख जरूर है कि दो साल पहले उनके शिमला आने पर वे सिक्योरिटी कारणों से उनसे मिल नहीं पाए। 

1973 बैच में जनरल रावत थे सहपाठी : बृज मोहन चौहान
वरिष्ठ अधिवक्ता उच्च न्यायालय बृज मोहन चौहान ने जनरल रावत के साथ बिताए दिनों को याद करते हुए कहा कि अफसोस इस बात का है कि मैं उनसे 2019 के दौरे के दौरान नहीं मिल पाया। रावत ने 1971 से 1973 तक की पढ़ाई उनके साथ की। एक अन्य सहपाठी कारोबारी धर्मपाल सूद ने भी जनरल रावत के साथ बिताए दिनों को याद किया और उनके निधन पर दुख जताते हुए उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। उन्होंने बताया कि जनरल रावत छोटा शिमला के पास आर्मी के सरकारी आवास में रहते थे।

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