उड़नपरी के नाम से मशहूर बख्शो देवी की सोमवार को स्कूल में अचानक तबीयत बिगड़ गई। स्टाफ ने आनन-फानन में ऑटो रिक्शा से जिला अस्पताल पहुंचाया। वहां चिकित्सकों ने बख्शो को उपचार तो दिया, मगर इमरजेंसी में आवश्यक इंजेक्शन और दवाइयां तक मौजूद नहीं थीं। साथ आए शिक्षकों ने अपने स्तर पर बाहर से दवाइयां और इंजेक्शन खरीदकर गरीब बच्ची को मुहैया कराए।
उसके बाद उसे वार्ड में दाखिल किया गया। यहां काफी देर तक बेड नसीब नहीं हुआ। इससे पूर्व इमरजेंसी वार्ड में भी बेड के लिए जद्दोजहद करनी पड़ी। बख्शो को एक अन्य मरीज के साथ बमुश्किल एडजस्ट करना पड़ा। काफी देर तक जब यह सब चलता रहा तो लोगों ने भी अस्पताल प्रशासन का अंदरखाते विरोध जताया।
पांच हजार मीटर की जिला स्तरीय दौड़ नंगे पांव जीतने के बाद सुर्खियों में आई ईसपुर की बख्शो राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला ऊना में पढ़ रही हैं। वह स्पोर्ट्स हॉस्टल में दाखिले के लिए सुबह-शाम अपने स्तर पर प्रैक्टिस कर रही हैं। सोमवार को स्कूल में अचानक हॉफ टाइम में चक्कर आ गया। अध्यापिकाओं अनीशा और अंजू सहित अन्य लोग उसे अस्पताल ले गए।