शिमला जिले के ऊपरी इलाकों में हुई ओलावृष्टि से सेब के बगीचों में भारी नुकसान हुआ है। इसे देखते हुए डॉ. वाईएस परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी और उद्यान विभाग ने समय रहते फफूंदनाशकों के छिड़काव करने की हिदायत दी है।
जिले के लगभग सभी बागवानों ने अपने बगीचों में एंटी हेल नेट लगाए हुए हैं लेकिन ओले पड़ने से कुछ बगीचों में हेलनेट भी टूट गए हैं। इससे सेब की फसल प्रभावित हुई है। ओलों से सेब के पेड़ों में घाव भी पड़ गए हैं। ऐसे में पेड़ों में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। बागवानी विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि बागवानों को ओलावृष्टि के तुरंत बाद बगीचों में 100 ग्राम कारबैन्डाजिम या 600 ग्राम मैनकोजैब का 200 लीटर पानी में घोल बनाकर सेब के पौधों पर छिड़काव करना चाहिए। इससे ओलावृष्टि से सेब के फलों और पत्तियों को होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है। ओले पड़ने से पेड़ पर पड़े घाव भी जल्दी भर जाते हैं। इसके अलावा संक्रमण से भी बचाव हो जाता है।