आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु जग्गी वासुदेव
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देश की सांस्कृतिक एवं धरोहर विरासत को पर्यटकों के समक्ष सही ढंग से प्रस्तुत करने के लिए हर राज्य की राजधानी में सांस्कृतिक गांव बसाए जा सकते हैं। आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में राज्यों के पर्यटन मंत्रियों के राष्ट्रीय सम्मेलन में सत्र को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि ये गांव अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों से 50 किलोमीटर के दायरे में बसाए जाने चाहिए। उन्होंने बताया कि इस गांव में उस राज्य की संस्कृति, पकवानों, पहनावे, नृत्य, संगीत, भाषा और अन्य स्थानीय खूबियों को एक ही स्थान पर उपलब्ध करवाया जाना चाहिए। इससे हम अपनी विविधताओं को पूरी दुनिया के समक्ष प्रस्तुत कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए सुरक्षा और स्वच्छता का माहौल उपलब्ध करवाना होगा। इसके लिए देश का मीडिया सही तस्वीर को प्रस्तुत करते हुए देश की इमेज बिल्डिंग की भूमिका निभा सकता है।
उन्होंने कहा के पर्यटन के क्षेत्र में विकास की अथाह संभावनाएं हैं। अगर बेहतर प्रयास किए जाएं तो देश की जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद ) में पर्यटन क्षेत्र के योगदान को 25 फीसदी तक बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि पर्यटक पानी के स्रोतों के किनारे जाना बहुत पसंद करते हैं। ऐसे में वन विभाग और पर्यटन विभाग को आपस में मिलकर जलाशयों को पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित करना होगा। इसके अलावा गंगा और नर्मदा नदी को पर्यटन विकास के गंतव्यों के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि मंदिरों को पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जाना चाहिए। इसके लिए देश के मंदिरों को पर्यटन के लिहाज से विकसित करना होगा। उन्होंने कहा कि भारत को आध्यात्मिक पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने के लिए कार्य करने का अब बिल्कुल सही समय है।