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विशेष बातचीत: शांता बोले-मैंने मंत्रिमंडल छोटा रखा, चेयरमैन न बनाकर घटाया था वित्तीय बोझ

Sat, 11 Feb 2023 10:42 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, धर्मशाला

सार

 हिमाचल का मुकाबला श्रीलंका से करना शांता को सही नहीं लगता है। कांग्रेस की गारंटियों, कांगड़ा की अनदेखी समेत कई ज्वलंत मुद्दों पर शांता कुमार ने अपनी बेबाक राय दी। पेश हैं ब्यूरो प्रभारी सुनील चड्ढा के साथ शांता कुमार के विशेष साक्षात्कार के अंश...
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भाजपा के वरिष्ठ नेता व पूर्व सीएम शांता कुमार - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश के पथ पर विकास की कालीन बिछाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार ने सुक्खू सरकार और भाजपा दोनों को कड़ी नसीहत दी है। हिमाचल का मुकाबला श्रीलंका से करना शांता को सही नहीं लगता है। कांग्रेस की गारंटियों, कांगड़ा की अनदेखी समेत कई ज्वलंत मुद्दों पर पूर्व सीएम शांता कुमार ने अपनी बेबाक राय दी। पेश हैं ब्यूरो प्रभारी सुनील चड्ढा के साथ शांता कुमार के विशेष साक्षात्कार के अंश...

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प्रश्न : मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू कह रहे हैं कि हिमाचल में हालात श्रीलंका जैसे हो सकते हैं, क्या किसी मुख्यमंत्री को ऐसा कहना चाहिए?
उत्तर : हिमाचल में वित्तीय हालात चिंताजनक हैं, इसमें कोई दोराय नहीं, लेकिन वित्तीय स्थिति के मामले में हिमाचल का मुकाबला श्रीलंका से करना आवश्यक नहीं था।
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प्रश्न : जब आप मुख्यमंत्री थे, तब आपने हिमाचल की वित्तीय स्थिति को कैसे सुधारा?
उत्तर : विकास और गरीबों की मदद करने का मेरे अंदर जुनून था। हिमाचल की वित्तीय स्थिति बेहतर बनाने के लिए शुरूआत मैंने खुद से की थी। जब मैं मुख्यमंत्री बना तो मेरे टेबल पर चार फोन थे। उनमें से मैंने दो फोन कटवा दिए। प्रदेश भर के दफ्तरों में अधिकारियों के अनावश्यक टेलीफोन कटवाए। मैंने मेरे साथ चलने वाला गाड़ियों का काफिला बंद कर करवा दिया। अफसरों को आदेश दिए कि मुख्यमंत्री की अगवानी करने के लिए दूसरे जिलों में डीसी और एसपी नहीं आएंगे। शनिवार और रविवार को अफसरों की ओर से सरकारी गाड़ियों का प्रयोग बंद करवाया। दिल्ली जाकर केंद्र सरकार से कहा कि प्रदेश में आईएएस अधिकारियों को कम किया जाए। ऐसा कर बतौर मुख्यमंत्री 1977 से 1980 में पहले ही साल 40 करोड़ बचाए। 1992 में मैं जब सीएम पद से हटा तब हिमाचल सरकार पर एक रुपये भी कर्ज नहीं था। हिमाचल में साधन बढ़ाने के लिए पन बिजली योजना को निजी भागीदारी में लाया। सभी योजनाओं में सरकार को 12 प्रतिशत रॉयल्टी दिलाई। अब हर साल इससे सरकार को 3000 करोड़ रुपये की आय होती है।

प्रश्न : कांग्रेस सरकार की 10 गारंटियां हिमाचल की वित्तीय स्थिति पर क्या असर डालेंगी, कैसे तरक्की करेगा हिमाचल?
उत्तर : कांग्रेस सरकार की गारंटियां आवश्यकता से अधिक हैं, इनको पूरा करना कठिन है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू भी इसके बारे में कई बार बात कर चुके हैं।

प्रश्न : जयराम सरकार के समय खोले गए संस्थानों को डिनोटिफाई करने का सुक्खू सरकार का निर्णय कितना उचित है?
उत्तर : जो संस्थान आवश्यकता और बजट के प्रावधान के अनुसार खोले गए हों, वे बंद नहीं होने चाहिए।

प्रश्न : हिमाचल में मुफ्त की योजनाओं के शुरू हुए ट्रेंड के बारे आपकी राय क्या है?
उत्तर : दुर्भाग्यपूर्ण है कि देश भर में वोट के लिए नेता और राजनीतिक दल कुछ भी करने को तैयार हैं। मैं मुफ्त की रेवड़ियों के खिलाफ हूं। जो गरीबी रेखा से नीचे है उसको सब कुछ दो। जो सामान्य और संपन्न है उसको मुफ्त रेवड़ी का लालच देना अच्छी बात नहीं है।
 

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प्रश्न 6. आपके विचार में विधानसभा चुनाव में भाजपा की हार का प्रमुख कारण क्या रहा?

उत्तर : पार्टी ने इस बारे में आत्मनिरीक्षण कर लिया है। हिमाचल में हम कांग्रेस से नहीं हारे, क्योंकि कांग्रेस हमको हराने की स्थिति में नहीं थी। हम अपनी गलतियों के कारण में हारे। केंद्र मेंमोदी और हिमाचल में ईमानदार जयराम ठाकुर के पांच साल के कार्यकाल में शानदार विकास के काम हुए थे। अगर हमारी अपनी गलतियां न रहतीं तो गुजरात की तरह हिमाचल में भाजपा की रिकार्ड जीत हो सकती थी।

प्रश्न : सुक्खू सरकार में कांगड़ा को सिर्फ एक ही मंत्री पद मिला, भाजपा संगठन में भी कांगड़ा को बड़ा पद नहीं मिला, क्या कहेंगे?
उत्तर : कांगड़ा हिमाचल का सबसे बड़ा जिला है। इतिहास गवाह है कि शिमला का रास्ता कांगड़ा से होकर ही जाता है। जिस पार्टी को कांगड़ा जिले में सबसे ज्यादा सीट मिलती हैं उसी की ही सरकार बनती है। पिछली और अब की सरकार में पूरे कांगड़ा लोकसभा क्षेत्र का ही ध्यान नहीं रखा गया।

प्रश्न : अनदेखी को पूरा करने के लिए क्या भाजपा का नया प्रदेशाध्यक्ष पद कांगड़ा को मिलना चाहिए?
उत्तर : पार्टी खुद इस पर विचार करेगी।

प्रश्न : भाजपा हो या कांग्रेस दोनों के राज में ब्राह्मण समुदाय की अनदेखी हो रही है। क्या कहेंगे ?
उत्तर : मेरी सोच जातीय आधार पर नहीं है न ही सोचना चाहिए, लेकिन पार्टी में इस विषय को लेकर कमी जरूर रही है। समाज के सभी वर्गों को बराबर प्रतिनिधित्व दिया जाना चाहिए। विधानसभा चुनाव में मेरे पास इस मुद्दे को लेकर ब्राह्मण समुदाय के लोग आए पर मेरे पास भी इसका कोई जवाब नहीं था।
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