शिमला के निजी स्कूलों ने नया शिक्षा सत्र शुरू होने के साथ ही आठ से दस फीसदी तक फीस बढ़ा दी है। प्रवेश के नाम पर स्कूल संचालक अभिभावकों से मोटी रकम वसूल रहे हैं। किताबें, स्टेशनरी और वर्दी पहले ही बाजार में महंगी हो चुकी है। पढ़ाई का बोझ बढ़ने से अभिभावक चिंतित हैं। शहर के सभी नामी स्कूलों में सालाना फीस में वृद्धि की है। इसमें ऑक्लैंड, डीएवी और सेंट एडवर्ड सहित अन्य सभी नामी स्कूल शामिल हैं।
शिमला और प्रदेश में नया शिक्षा सत्र शुरू हुए एक महीना बीत चुका है। ऐसे में अब अप्रैल से बढ़ी हुई फीस ने अभिभावकों की चिता बढ़ा दी है। स्कूल ने अभिभावकों को फीस और वार्षिक फंड को किस्तों में अदा करने की विकल्प दिए हैं। डीएवी लक्कड़ बाजार स्कूल में चार किस्तों के साथ, ऑकलैंड हाउस स्कूल में तीन और सेंट एडवर्ड में आठ किस्तों के साथ सालाना फीस ली जाती है।
डीएवी लक्कड़ बाजार में जहां 2022-23 सत्र में एक किश्त 10,720 थी। 2023-24 सत्र में 5,040 रुपये की वृद्धि के साथ एक किस्त 11,540 तक पहुंच गई है। ऑकलैंड स्कूल में पिछले सत्र की एक किस्त 20,510 में 5,608 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। सेंट एडवर्ड में जहां दूसरी कक्षा की सालाना फीस 48,000 थी। वह अब तीसरी कक्षा में बढ़कर 55,730 हाे गई है।
किस स्कूल की कितनी बढ़ी फीस
स्कूल सत्र 2022-23 सत्र 2023-24
ऑकलैंड हाउस 61,530 66,078
सेंड एडवर्ड 48,000 55,730
डीएवी लक्कड़ बाजार 42,880 46,160
पढ़ाई का बोझ लगातार बढ़ रहा है : हिमांशी
अभिभावक हिमांशी ने कहा कि उनकी बेटी दूसरी कक्षा में पढ़ती है। इनका कहना है कि बच्चों की पढ़ाई का बोझ लगातार बढ़ रहा है। स्टेशनरी, पाठ्य सामग्री पहले से महंगी हो गई है। फीस भी हर साल बढ़ जाती है। ऐसे में बच्चों को कैसे पढ़ाया जाए, जितना कमाते हैं उससे ज्यादा तो बच्चों की पढ़ाई में ही लगता है।
फीस के हिसाब से नहीं मिल रही पढ़ाई की सुविधा
अभिभावकों ने बताया कि निजी स्कूल जिस हिसाब से फीस बढ़ा रहे हैं, उस हिसाब से बच्चों की पढ़ाई में सुविधा नहीं मिल रही है। इनका कहना है कि कई स्कूलों में एक अध्यापक दो-दो विषयों को पढ़ा रहे हैं। इसमें बच्चों को सही तरीके से विषय की जानकारी नहीं मिल पाती।
अगली कक्षा में प्रवेश लेने के लिए चुकाने पड़े 7,730 रुपये
अभिभावक देवेंद्र ने बताया कि उनका बेटा तीसरी कक्षा में पढ़ता है। इन्होंने बताया कि दूसरी कक्षा के मुकाबले तीसरी कक्षा में प्रवेश लेने के लिए उन्हें 7,730 रुपये ज्यादा चुकाने पड़े। देवेंद्र ने कहा कि बच्चों की पढ़ाई का बोझ हर साल बढ़ता जा रहा है। इससे उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
निजी स्कूलों की ओर से लगातार हर वर्ष मनमाने तरीके से फीस में वृद्धि की जा रही है। सरकार को निजी स्कूलों की बढ़ाई जा रही फीसों पर अंकुश लगाना चाहिए। साथ ही फीस के संचालन, पाठ्यक्रम और विषय वस्तुओं के लिए नियम बनाने चाहिए।
-विजेंद्र मेहरा, छात्र अभिभावक मंच
फीस में ज्यादा वृद्धि नहीं होनी चाहिए। इससे संबंधितसंबधित सभी निर्णय शिक्षा विभाग लेता है। लेकिन अभी तक इससे संबधित कोई शिकायतें नहीं आई है।
-राजेश कुमार, कार्यवाहक डिप्टी डायरेक्टर