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फाइलों में दब गया केंद्र सरकार का ये प्रोजेक्ट, सरकार नहीं गंभीर

Fri, 10 Feb 2017 12:37 PM IST
अनिमेष कौशल/अमर उजाला, शिमला
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केंद्र सरकार देश में सोलर पार्क विकास के दूसरे चरण की शुरुआत करने जा रही है। इस चरण में 20 हजार मेगावाट की अतिरिक्त क्षमता का प्रस्ताव बुधवार को केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आम बजट में रखा, लेकिन केंद्र सरकार की ओर से साल 2014 के बजट में हिमाचल प्रदेश के शीत मरुस्थल लाहौल में एक हजार मेगावाट का सोलर पार्क बनाने को लेकर की गई घोषणा पर आज तक काम शुरू नहीं हुआ है।
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केंद्र और राज्य सरकारों की बजट घोषणाएं किस तरह धरातल का जायजा लिए बिना कर दी जाती हैं, इसका एक उदाहरण हिमाचल में देखने को मिला है। मोदी सरकार ने केंद्र में सत्ता संभालते ही जुलाई 2014 में पेश किए अपने पहले बजट में लाहौल स्पीति को सौर ऊर्जा हब बनाने की घोषणा की थी। लेकिन, हिमाचल के लिए की गई इस घोषणा ने फाइलों में ही दम तोड़ दिया।

घोषणा के तीन साल गुजरने के बाद भी केंद्र और राज्य सरकार प्रोजेक्ट के लिए गंभीर नहीं हैं। दस जुलाई 2014 को पेश किए गए साल 2014-15 के आम बजट में केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने हिमाचल को बड़ी सौगात दी थी। बजट में लाहौल स्पीति जिले को सौर ऊर्जा से रोशन करने का प्रावधान किया गया। केंद्र की इस घोषणा के बाद राज्य बिजली बोर्ड ने काजा में भूमि तलाशने का काम शुरू किया।
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क्षेत्र में दो हजार हेक्टेयर भूूमि को चिह्नित कर प्रस्ताव केंद्र को भेजा। साथ ही बोर्ड प्रबंधन ने काजा से वांगतु तक ट्रांसमिशन लाइन नहीं होने की जानकारी भी दी। बोर्ड प्रबंधन और केंद्र सरकार के बीच इस प्रस्ताव को लेकर करीब दो साल तक पत्राचार चला लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। अब काफी समय से इस मामले को लेकर पत्राचार भी बंद हो गया है। केंद्र और राज्य सरकार ने सोलर पार्क की बजट घोषणा को घोषणा समझकर ही भुला दिया है।

काजा में चिह्नित की है दो हजार हेक्टेयर जमीन
शीत मरुस्थल लाहौल के काजा में सोलर पार्क प्रोजेक्ट स्थापित करने के लिए बिजली बोर्ड ने दो हजार हेक्टेयर जमीन चिह्नित की हुई है। लाहौल में रेडिएशन अधिक होने और प्रदेश में किसी अन्य जगह इतनी अधिक भूमि उपलब्ध नहीं होने पर बिजली बोर्ड ने लाहौल का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा था।

काजा से वांगतु तक ट्रांसमिशन लाइन न होने से फंसा पेच
काजा सोलर पार्क प्रोजेक्ट से उत्तरी ग्रिड तक सौर ऊर्जा पहुंचाना प्रस्तावित है। लेकिन, काजा से वांगतु तक 250 किलोमीटर के क्षेत्र में ट्रांसमिशन लाइन नहीं होेने की वजह से प्रोजेक्ट में पेच फंस गया है। बिजली बोर्ड ने सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी और पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया से ट्रांसमिशन लाइन बनाने की मांग की है।

20 फीसदी सौर ऊर्जा खरीदने से बोर्ड ने खड़े किए हाथ
सोलर पार्क प्रोजेक्ट के तहत शर्त रखी गई है कि हिमाचल बिजली बोर्ड को प्रोजेक्ट से पैदा होने वाली कुल ऊर्जा का 20 फीसदी स्वयं खरीदना होगा। इस शर्त के चलते बिजली बोर्ड के हाथ खड़े हो गए हैं। सौर ऊर्जा के महंगे होने और अन्य बिजली परियोजनाओं से पहले ही 82 फीसदी बिजली खरीदने की दलील बोर्ड प्रबंधन दे रहा है।

केंद्रीय एजेंसियों से नहीं आया जवाब
काजा से वांगतु तक ट्रांसमिशन लाइन को लेकर अभी पेच फंसा हुआ है। केंद्रीय एजेंसियों को लिखित में बिजली बोर्ड ने सूचित कर दिया है। उनकी ओर से अभी कोई जवाब नहीं आया है। उनकी ओर से पहल होते ही इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर दिया जाएगा। बोर्ड ने प्रोजेक्ट लगाने को भूमि चिह्नित की हुई है।- बीएम सूद, निदेशक तकनीकी, राज्य बिजली बोर्ड
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