पहले मकान में रत्तीराम का बड़ा बेटा, बहू और दो बच्चे सो रहे थे। इसी मकान के दूसरे कमरे में उसकी बेटी, दामाद और दो नातिन थे। जबकि रत्तीराम अपने छोटे बेटे मदन के साथ दूसरे मकान में सो रहा था। इसमें मदन की पत्नी और बच्चे भी थे। घर के साथ ही गोशाला भी थी, जिसमें बंधे मवेशी भी दब गए है।
देर रात जिस समय यह हादसा हुआ, उस समय रत्तीराम के छोटे बेटे मदन ने कुछ गिरने की आवाज सुनी तो वह एकदम से उठ गया। उसने अपने परिवार को उठाया और अपने बड़े भाई को उठाने के लिए भागा, लेकिन वहां पर उसके भाई का मकान ही नहीं दिखा, जोकि मलबे में दब गया था।
पिता का ध्यान आते ही वह उन्हें उठाने के लिए गया, जिनका कमरा इसके कमरे के साथ ही था। बचाव कार्य के लिए चिल्लाने लगा, लेकिन देर रात बारिश के बीच उसकी आवाज सुनने वाला कोई नहीं था। जहां पर यह हादसा हुआ है, वहां सिर्फ दो ही भवन थे। जबकि अन्य लोगों के घर थोड़ी-थोड़ी दूरी पर दूसरी तरफ हैं।
बहन को बड़ी मशक्कत के बाद बाहर निकाला गया। जबकि बड़े भाई, भाभी, जीजा, भांजों समेत भतीजों को निकाल नहीं पाया। हादसे वाले क्षेत्र के लिए सभी रास्ते भी बंद थे। देर रात करीब 2:00 बजे जब साथ लगते दूसरे गांव में इसकी सूचना मिली तो लोग मौके पर पहुंचे। बचाव कार्य में जुट गए। सुबह करीब सात बजे तक मलबे में दबे सभी लोगों के शवों को बाहर निकाला गया।