शनिवार रात और रविवार दोपहर तक चले अभियान के दौरान 10 ट्रैकर, 7 पोर्टर और 2 गाइड को बचाव टीम ने सुरक्षित निकाल लिया। सोमवार सुबह से ही आईटीबीपी की 17वीं वाहिनी, पुलिस जवान और ब्रुआ गांव के लोग बचाव अभियान में जुट गए थे, लेकिन बर्फीली हवाओं और बर्फबारी होने के कारण अभियान को रोकना पड़ा।
हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले की सांगला घाटी के लिए निकले 22 सदस्यीय ट्रैकिंग दल के तीन मृतक ट्रैकरों को बुरन पास से लाने के लिए चला अभियान सोमवार को रोकना पड़ा। बर्फीली हवाएं और बर्फबारी के चलते ऐसा करना पड़ा। करीब 15 हजार फीट की ऊंचाई पर फंसे ट्रैकरों को निकालने में भारत तिब्बत सीमा पुलिस बल, पुलिस और बुरआ गांव के 28 लोगों के दल ने जिला प्रशासन से हेली सर्विस की मांग की है।
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शनिवार रात और रविवार दोपहर तक चले अभियान के दौरान 10 ट्रैकर, 7 पोर्टर और 2 गाइड को बचाव टीम ने सुरक्षित निकाल लिया। सोमवार सुबह से ही आईटीबीपी की 17वीं वाहिनी, पुलिस जवान और ब्रुआ गांव के लोग बचाव अभियान में जुट गए थे, लेकिन बर्फीली हवाओं और बर्फबारी होने के कारण अभियान को रोकना पड़ा।
एसपी किन्नौर अशोक रत्न ने बताया कि सोमवार को तेज बर्फीली हवाओं और बर्फबारी के चलते बचाव अभियान को रोकना पड़ा।
लम्खागा पास में लापता दो ट्रैकरों की तलाश में मौसम बना बाधा
उत्तरकाशी के हर्षिल से किन्नौर जिले के छितकुल के लम्खागा पास की ट्रैकिंग पर निकले दो ट्रैकर अभी भी लापता हैं। रविवार और सोमवार को मौसम खराब होने के कारण सेना के हेलीकॉप्टर नहीं उड़ पाए, जिस कारण लम्खागा पास में लापता हुए ट्रैकर की तलाश नहीं की जा सकी। मंगलवार को यदि मौसम साफ रहा तो फिर से लापता ट्रैकर की तलाश के लिए बचाव अभियान चलाया जाएगा।