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हिमाचल में बर्फबारी से जड़ से उखड़े सेब के पेड़, टहनियां टूटी, फ्लावरिंग को नुकसान

Sat, 24 Apr 2021 03:31 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, शिमला

सार

हिमाचल प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में अप्रैल में हुई बर्फबारी और ओलावृष्टि से सेब बगीचों और अन्य गुठलीदार फसलों को भारी नुकसान हुआ है। बर्फबारी से सेब के पेड़ जड़ से उखड़ गए हैं। एंटी हेलनेट और खड़े ढांचे ध्वस्त हो गए हैं। सेब पेड़ की टहनियां टूट गई हैं। शिमला, कुल्लू, किन्नौर, लाहौल, चंबा, मंडी और कांगड़ा के ऊपरी इलाकों में सेब फसल को भारी नुकसान हुआ है। 
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बर्फबारी से सेब को भारी नुकसान। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में अप्रैल में हुई बर्फबारी और ओलावृष्टि से सेब बगीचों और अन्य गुठलीदार फसलों को भारी नुकसान हुआ है। बर्फबारी से सेब के पेड़ जड़ से उखड़ गए हैं। एंटी हेलनेट और खड़े ढांचे ध्वस्त हो गए हैं। सेब के पेड़ की टहनियां टूट गई हैं। शिमला, कुल्लू, किन्नौर, लाहौल, चंबा, मंडी और कांगड़ा के ऊपरी इलाकों में सेब फसल को भारी नुकसान हुआ है। 

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राज्य मुख्यालय में पहुंची आकलन रिपोर्ट के अनुसार अभी तक बागवानी फसलों को करीब 5.84 करोड़ का नुकसान हुआ है। सरकार को सोमवार को विस्तृत रिपोर्ट सौंपी जाएगी। दूसरी ओर, प्रदेश के मैदानी जिलों कांगड़ा, हमीरपुर, ऊना और सोलन के बीबीएन क्षेत्र में गेहूं की कटी फसल खेतों में ही खराब हो गई है। कुछ इलाकों में खड़ी फसल काली पड़ने लगी है। बीबीएन क्षेत्र में 30 फीसदी गेहूं की कटी फसल बरबाद हो गई है। वहीं, आम, लीची, आड़ू और प्लम को नुकसान पहुंचा है। 

कुल्लू जिले में बर्फबारी और ओलावृष्टि से सेब फसल को 50 से 80 प्रतिशत तक नुकसान हुआ है। किन्नौर में भी बागवानी को खासा नुकसान हुआ है। चंबा में विभाग ने बागवानों को 25 प्रतिशत नुकसान का आकलन किया गया है। सोलन की डांगरी पंचायत, बसाल, चायल, धर्मपुर क्षेत्र में टमाटर, शिमला मिर्च समेत गुठलीदार फलों के 70 फीसदी पौधे नष्ट हो गए हैं। सिरमौर के नौहराधार क्षेत्र में आड़ू और सेब की फ्लावरिंग को नुकसान के साथ फलदार पौधों से फल झड़ गए हैं। मटर और टमाटर सहित सब्जियों को भी नुकसान हुआ है। मंडी के करसोग समेत ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सेब पौधों की टहनियां टूट गई हैं।
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बागवानी निदेशक जेपी शर्मा ने कहा कि बागवानी क्षेत्र को करीब 5.84 करोड़ का नुकसान हुआ है। चंबा और शिमला जिले के कई हिस्सों से रिपोर्ट का इंतजार है। इसके बाद विस्तृत रिपोर्ट सोमवार को सरकार को भेजी जाएगी। कृषि निदेशक नरेश ठाकुर ने कहा कि कृषि फसलों को हुए नुकसान की रिपोर्ट आनी है। गेहूं की फसल अधिकांश क्षेत्रों में काट ली है। कई क्षेत्रों में नई फसलों की बिजाई की जा रही है। कुछ इलाकों में गेहूं की फसल नहीं कटी है, वहां फसलों में नमी हो गई है। 

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केंद्र को भेजी नुकसान की वीडियो

- फोटो : अमर उजाला
बागवानी, राजस्व और जल शक्ति मंत्री महेंद्र सिंह ने कहा कि प्रदेश में बर्फबारी, ओलावृष्टि और बारिश से बागवानी क्षेत्र को काफी नुकसान हुआ है। इसके वीडियो केंद्र को भेज दिए हैं। बगीचों में एंटी हेलनेट टूटने से फलदार पेड़ भी टूटे हैं। पेड़ों में लगे फल झड़े हैं। बारिश से पेयजल स्रोतों का जल स्तर बढ़ने से लोगों को राहत मिली है।

खड्डों-नदियों का जलस्तर बढ़ा, नहीं रहेगा पेयजल संकट
हिमाचल प्रदेश में बीते कुछ दिन से जारी बारिश के कारण सूबे में सूखे का संकट टल गया है। बारिश से प्राकृतिक जल स्रोतों में पानी बढ़ने से लोगों को काफी राहत मिली है। इससे पेयजल संकट काफी हद तक दूर हो गया है। किन्नौर में जलशक्ति विभाग की 99 पेयजल स्कीमें सूखे की चपेट में थीं। ब्यास नदी समेत जिलों की अन्य खड्डों और नालों में जलस्तर बढ़ गया है। हमीरपुर में बारिश से पेयजल स्रोतों का जलस्तर 25 से 50 फीसदी बढ़ा है। बारिश के चलते अब अगले एक माह तक जिले में पेयजल किल्लत नहीं रहेगी। 
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