100 मिलीग्राम प्रति लीटर होना चाहिए सस्पेंडिड सॉलिड
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी के बरमू गांव के पास स्थित स्नोडन सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के उपचारित पानी की गुणवत्ता में लगातार गिरावट जारी है। लगातार तीसरे महीने इस प्लांट का सैंपल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जांच में फेल हो गया है। इससे पहले नवंबर और दिसंबर में भी प्लांट से छोड़ा जा रहा पानी तय मापदंडों से अधिक दूषित पाया गया था।
अब 30 जनवरी को लिए सैंपल के परीक्षण में सस्पेंडिड सॉलिड 158 मिलीग्राम प्रति लीटर दर्ज किया गया जबकि इसकी अधिकतम सीमा 100 मिलीग्राम प्रति लीटर होनी चाहिए। बायोलॉजिकल ऑक्सीजन डिमांड 135 मिलीग्राम प्रति लीटर पाई गई जो तय मानक 30 मिलीग्राम प्रति लीटर से कई गुना अधिक है। इसी तरह केमिकल ऑक्सीजन डिमांड 328 मिलीग्राम प्रति लीटर दर्ज की गई जबकि इसकी अधिकतम सीमा 250 मिलीग्राम प्रति लीटर तय है। इनका स्तर बढ़ना जलीय जीवों के लिए घातक है और मनुष्यों की सेहत के लिए भी खतरनाक है।
यह लगातार तीसरा महीना है जब स्नोडन प्लांट का सैंपल प्रदूषण मानकों पर खरा नहीं उतरा है।
प्लांट की विफलता से नालों और जलस्रोतों के प्रदूषित होने का खतरा बढ़ रहा है जिससे स्थानीय निवासियों और आसपास के इलाकों में जलजनित बीमारियां फैलने की आशंका बढ़ गई है। बरमू गांव के निवासी पहले ही बदबू, गंदगी और मच्छरों की समस्या से परेशान हैं। स्थानीय निवासी का कहना है कि प्लांट की खराब स्थिति की शिकायत कई बार की जा चुकी है, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। बरमू और आसपास के क्षेत्रों के लोगों का कहना है कि यदि जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो स्वास्थ्य संकट और गहरा सकता है। प्रशासन को जल्द प्लांट की कार्यप्रणाली में सुधार करना होगा ताकि जल प्रदूषण को रोका जा सके और लोगों को स्वच्छ वातावरण मिल सके।
अभी तक पूरा नहीं हुआ अपग्रेडेशन का कार्य
वर्ष 2021 में प्लांट के अपग्रेडेशन के लिए टेंडर जारी किए थे लेकिन अब तक रेट्रोफिटिंग का कार्य पूरा नहीं हुआ है। अधिकारियों का दावा है कि सुधार कार्य जारी है लेकिन लगातार खराब हो रही रिपोर्टों से यह साफ है कि स्थिति में कोई विशेष सुधार नहीं हुआ। पेयजल कंपनी के कनिष्ठ अभियंता नवनीत डोगरा ने बताया कि प्लांट को अपग्रेड किया जा रहा है, रेट्रोफिटिंग पूरी होने के बाद पानी की गुणवत्ता में सुधार होगा। हम इस मुद्दे पर गंभीरता से काम किया जा रहा है।