एसएमसी शिक्षकों की भर्ती के खिलाफ दायर याचिका में हाईकोर्ट ने एसएमसी अध्यापकों को प्रतिवादी बनाते हुए उनसे दो सप्ताह के भीतर जवाब तलब किया है। न्यायाधीश सुरेश्वर ठाकुर व न्यायाधीश सीबी बारोवालिया की खंडपीठ ने इस मामले पर सुनवाई की। मामले की आगामी सुनवाई 26 जून को होगी। पिछली सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से हाईकोर्ट को आश्वासन दिया गया था कि कोर्ट के आगामी आदेशों तक प्रदेश के सरकारी स्कूलों में किसी भी नए एसएमसी अध्यापक की नियुक्ति या चयन नहीं किया जाएगा।
प्रार्थी कुलदीप कुमार और अन्यों के अनुसार सरकार स्टॉप गैप अरेंजमेंट के नाम पर एसएमसी भर्तियां करने जा रही है। जबकि, एसएमसी शिक्षकों की नियुक्ति गैरकानूनी है। यह सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की सरासर अवहेलना है। प्रार्थियों की यह दलील है कि एसएमसी शिक्षकों की भर्तियां भर्ती एवं पदोन्नति नियमों के विपरीत हैं।
इससे सभी को समान अवसर जैसे मौलिक अधिकार का उल्लंघन हो रहा है। यह भर्तियां शिक्षा का अधिकार अधिनियम के प्रावधानों के भी विपरीत हैं। दूसरी तरफ एसएमसी अध्यापकों का कहना है कि वे वर्ष 2012 से हिमाचल के अति दुर्गम क्षेत्रों में बिना किसी रुकावट के अपनी सेवाएं दे रहे हैं और उनका चयन प्रदेश सरकार की ओर से नियमों के तहत किया गया है। बता दें कि कोर्ट में मामला विचाराधीन होने के चलते सरकार करीब 2600 एसएमसी शिक्षकों को सेवा विस्तार नहीं दे पा रही है।