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सरकारी स्कूलों में इस साल स्मार्ट वर्दी बंटने पर संशय, ये है वजह

Fri, 26 Oct 2018 11:38 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले साढे़ आठ लाख से अधिक विद्यार्थियों को इस साल स्मार्ट वर्दी बंटने पर संशय है। शिक्षा विभाग और खाद्य आपूर्ति निगम की लचर कार्यप्रणाली से वर्दी खरीद का मामला उलझ गया है। टेंडर अवार्ड करने की फाइल डेढ़ माह से अफसरों के कमरों में घूम रही है लेकिन फैसला नहीं हो पा रहा। शीतकालीन स्कूलों में दिसंबर महीने में शैक्षणिक सत्र खत्म हो जाएगा। ऐसे में इस साल विद्यार्थियों को नई वर्दी मिलना मुश्किल दिख रहा है।

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जयराम सरकार ने 8.55 लाख विद्यार्थियों को अटल स्कूल वर्दी योजना के तहत नई वर्दी देने की घोषणा की है। बीते तीन माह के दौरान नई वर्दी तय करने के लिए कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं। राज्य सरकार ने इस बार सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले पहली से जमा दो कक्षा के 8.55 लाख विद्यार्थियों को निजी स्कूलों की तर्ज पर कलरफुल वर्दी देने का फैसला लिया है। प्रारंभिक शिक्षा विभाग ने वर्दी की खरीद का जिम्मा खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम को सौंपा है।

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करीब डेढ़ माह पूर्व निगम ने इसके लिए टेंडर आमंत्रित किए। बताया जा रहा है कि टेंडर अवार्ड करने की स्थिति में पहुंचते ही कुछ कंपनियों ने सवाल उठा दिए हैं। सरकार से टेंडर प्रक्रिया में अनियमितताएं बरतने की शिकायत की गई है। इसी दौरान कलरफुल वर्दी के कुछ सैंपल भी गुणवत्ता की कसौटी पर खरे नहीं उतरे हैं। टेंडर प्रक्रिया सवालों के घेरे में आते ही खाद्य आपूर्ति निगम ने प्रक्रिया को रोक दिया है।

बीते तीन सप्ताह से इस मामले को लेकर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। सरकार न तो टेंडर रद्द करने के आदेश दे रही है और न ही टेंडर अवार्ड करने को मंजूरी दी जा रही है। ऐसे में यह मामला अब फंस गया है। खाद्य आपूर्ति निगम के प्रबंध निदेशक एसएस गुलेरिया का कहना है कि स्मार्ट वर्दी को लेकर शिक्षा विभाग को फाइल भेजी गई है। इस बाबत सरकार के जो भी आदेश आएंगे, उन पर कार्रवाई की जाएगी।
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