बाजार में छाई मंदी का असर ऊना जिला के उद्योगों के साथ साथ अन्य व्यापारिक संस्थानों पर भी पड़ना शुरू हो गया है। बाजार में तैयार माल की मांग घट गई है। उद्योगों में तैयार माल को मार्केट नहीं मिल रही, जिसके चलते ज्यादातर उद्योगों में उत्पादन तकरीबन 60 फीसदी तक घट गया है। स्थानीय औद्योगिक क्षेत्र में कुछेक उद्योगों में तो पिछले तीन चार माह से तैयार माल बिक ही नहीं रहा, जिससे अस्थाई श्रमिकों की छंटनी तक ही नौबत आ गई है।
मैहतपुर के एक व्यवसायी ने तो अपने कर्मियों की छंटनी करते हुए अपने चार कर्मचारियों को नौकरी से हटा दिया है। मैहतपुर के एक शराब उद्योग में पिछले चार माह से तैयार माल न बिकने से उत्पादन लगभग ठप हो चुका है। कारोबारी मंदी की प्रमुख वजह नोटबंदी के बाद पैदा हुए हालात को मान रहे हैं। 50 हजार अथवा इससे ज्यादा की नकद रकम के लेन-देन पर लगे सरकारी पहरे की वजह भी मंदी का दूसरा बड़ा कारण बताया जा रहा है।
चेक बाऊंस होने की स्थिति में तुरंत कोई पुख्ता कार्रवाई का न होना भी मंदी की तीसरी वजह है। ऊना जिला में एक हजार से ज्यादा अतिलघु, लघु तथा कुछेक मझोले उद्योग हैं, जिनमें से ज्यादातर के उत्पादन में भारी गिरावट आ चुकी है। मंदी का असर कारोबारियों से लेकर मजदूर वर्ग तक पर पड़ा है। मजदूरों को काम नहीं मिल रहा, कारोबारियों का माल नहीं बिक रहा और नये निवेश से भी परहेज किया जा रहा है।
इंडस्ट्री एसोसिएशन जिला ऊना के अध्यक्ष प्रो. भोलानाथ कश्यप ने माना कि 60 फीसदी तक उद्योग मंदी के चपेट में हैं। उत्पादन गिर चुका है। पहले से तैयार माल बिक नहीं रहा है। मैहतपुर उद्योग संघ के पूर्व उपाध्यक्ष बलतेज इंद्रसिंह कहते हैं कि मंदी से कारोबार काफी प्रभावित हुआ है। बाजार सुस्त पड़ा हुआ है। बाजार में माल की मांग ही नहीं है।
उद्योग संघ मैहतपुर के पूर्व अध्यक्ष बलराम चंदेल ने कहा कि फार्मा उद्योग, प्लास्टिक उद्योग से लेकर अन्य छोटे उद्योगों पर मंदी का असर पड़ा है। तैयार माल गोदामों में भरा पड़ा है, बिक्री ठप पड़ी है, ऐसे में छंटनी के हालात पैदा हो गए हैं।
मैहतपुर के प्रसिद्ध गोल्ड व्यवसायी राजीव सोनी ने कहा कि चेक बाऊंस पर सरकार का कड़ा कानून न होने से कारोबारी चेक लेने से डर रहे हैं। चेक का रिस्क कोई लेना नहीं चाहता, इससे भी बिक्री पर असर पड़ा है। केंद्र सरकार चेक बाऊंस होने की स्थिति पर फौरी कार्यवाई का प्रावधान करे, तो बाजार में तैयार माल की बिक्री बढ़ सकती है और मंदी काफी हद तक दूर हो सकती है।