समूचा विश्व कोरोना की दवा बनाने में जुटा हुआ है, वहीं दूसरी ओर देश में बनने वाली दवाएं मानकों पर खरा नहीं उतर रही हैं। इसमें एशिया की 45 फीसदी दवा निर्यात करने वाला हिमाचल प्रदेश भी शामिल है। इस वर्ष जनवरी से जून के छह माह में 58 दवाएं मानकों पर खरा नहीं उतरी हैं। इससे पहले जनवरी माह में देशभर में लिए गए सैंपलों में से फेल हुई 34 दवाओं में सूबे के उद्योगों की चार और फरवरी माह में 38 में से 6 दवाएं, मार्च माह में 46 में से 13, अप्रैल माह में 59 में से 23, मई माह में 25 में से 6 और जून माह में 20 में से 6 दवाएं फेल हुई हैं।
इससे पहले 2019 में सूबे के उद्योगों की 100 दवाएं, जबकि 2018 में भी 100 दवाओं के सैंपल फेल हो चुके हैं। प्रदेश भर में करीब 750 फार्मा उद्योग हैं। सरकार दवाओं की गुणवत्ता को लेकर पहले ही फटकार लगा चुकी है, जिसके बाद उद्योग भी हरकत में आए। इसके लिए दवा नियंत्रक प्राधिकरण के पांच जोन भी गठित किए गए हैं, बावजूद दवाओं के सैंपल फेल हो रहे हैं। राज्य दवा नियंत्रक नवनीत मारवाहा ने कहा कि दवाओं के फेल होने में वातावरण का भी असर रहता है और बददी में जल्द ही ड्रग टेस्टिंग लैब खुल जाएगी। उन्होंने कहा कि जारी हुए ड्रग अलर्ट के बाद दवा निरीक्षकों को इन पर कार्रवाई करने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।