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शांत पर्व: दो दिन में 350 गांवों के 35 हजार शाठी और पाशी बने गवाह

Sun, 02 Jul 2023 08:19 PM IST
अरविन्द ठाकुर संवाद न्यूज एजेंसी, सतौन (सिरमौर)

सार

टटियाणा के ऐतिहासिक महापर्व शांत में शाठी-पाशी भाईचारे की मिसाल कायम की गई। ग्रामीणों ने पाबूच ब्राह्मण को रविवार को विदाई देकर शांत पर्व का समापन किया।
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शांत महापर्व में उमड़ी भीड़। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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गिरिपार के टटियाणा गांव में शांत पर्व का धूमधाम से समापन हो गया। रविवार को शिलाई, शिमला, जौनसार, हरिपुरधार, नोहराधार, संगड़ाह सहित क्षेत्र की ठुंदू बिरादरी के 200 से ज्यादा गांव के लोगो ने शांत पर्व में हाजिरी लगाई। शनिवार और रविवार को 350 से ज्यादा गांव के 35,000 के करीब शाठी और पाशी लोगों ने भाग लिया। रविवार को उपायुक्त सिरमौर सुमित खिमटा भी पहुंचे। उन्होंने महासू देवता और ठारी माता के चरणों मे शीश नवाया।

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सांसद सुरेश कश्यप, पांवटा साहिब के विधायक सुखराम चौधरी और के पूर्व विधायक बलदेव तोमर भी मौजूद रहे। उपायुक्त सिरमौर सुमित खिमटा ने कहा कि यह एक ऐतिहासिक क्षण है। टटियाणा के ग्रमीणों ने जिस शांत माहौल में महानुष्ठान करवाया। वह काबिलेतारीफ है। इस मौके पर सांसद सुरेश कश्यप ने सांझा प्रांगण को तीन लाख रुपये देने की घोषणा की है। इसके अलावा विधायक सुखराम चौधरी ने अपनी ऐच्छिक निधि से 50,000 दिए हैं।

शाठी और पाशी भाईचारे की मिसाल
टटियाणा के ऐतिहासिक महापर्व शांत में शाठी-पाशी भाईचारे की मिसाल कायम की गई। ग्रामीणों ने पाबूच ब्राह्मण को रविवार को विदाई देकर शांत पर्व का समापन किया। शांत पर्व के शुरू होते ही पूरे गांव को एक सूत (रक्षा धागा) में बांधा गया है। टटियाणा गांव के पुरोहित खड़कांह गांव के पाबूच ब्राह्मणों की टीम ने यह कार्य किया है और शांत पर्व का वैदिक मंत्रों से अनुष्ठान पूरा किया है। रविवार को टटियाणा के ग्रामीणों ने अनाज, घी, कपड़े और धन देकर अपने कुल पुरोहित की विदाई की।
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एक दूसरे के कट्टर दुश्मन माने जाते थे शाठी-पाशी
शाटी को कौरवों और पांशी पांडवों के वंशज माने जाते हैं. पुराने दौर में दोनों एक दूसरे के दुश्मन थे। शाठी और पाशी के लोग शिलाई, पांवटा, पच्छाद , शिमला, रेणुकाजी, आदि विधानसभा क्षेत्र के अलावा उत्तराखंड के जौनसार में भी रहते है। बदलते समय के साथ अब दोनों पक्षों के लोग एक गांव में बसते हैं।

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