श्रीनगर में आतंकी हमले में शहीद हुए अशोक कुमार की पार्थिव देह शुक्रवार देर रात को सुलह विस की पंचायत काहनफट्ट के देहरू गांव पहुंची। शहीद का अंतिम संस्कार शनिवार को किया जाएगा। सेना की गाड़ी चंडीगढ़ से उनका पार्थिव शरीर लेकर पहुंची। उधर, पिंजौर में रहने वाली शहीद की पत्नी सुषमा शुक्रवार को बच्चों के साथ काहनफट्ट पहुंचीं। पत्नी और माता का रो-रोकर बुरा हाल है।
बीते गुरुवार को लाडले की शहादत की खबर आने के बाद से घर में चूल्हा नहीं जला है। परिवार के किसी सदस्य ने अन्न का दाना तक नहीं खाया है। बताया जा रहा है कि शहीद अशोक की माता शुक्रवार को बीमार हो गई हैं। बीते गुरुवार को श्रीनगर में आतंकी हमले में अशोक कुमार और उनका एक अन्य साथी शहीद हो गए थे। लिहाजा, अब उनका अंतिम संस्कार शनिवार सुबह होगा।
कबड्डी-वॉलीवाल खिलाड़ी थे मिलनसार स्वभाव के अशोक
सीआरपीएफ में भर्ती हुए शहीद अशोक कुमार के चचेरे भाई जगदीश की मानें तो अशोक खेलों में भी अच्छा खासा शौक रखते थे। वह स्कूल समय में कबड्डी और वॉलीबाल के खिलाड़ी रहे हैं। धीरा में जमा दो की पढ़ाई करने के बाद साल 2004 में सीआरपीएफ में भर्ती हो गए थे। वहां चालक के पद पर तैनात थे। हंसीमजाक व खुशमिजाज रहने वाले अशोक कुमार हर किसी बात कर चलते थे। बचपन से ही मिलनसार स्वभाव के थे।
मुख्यमंत्री ने अशोक कुमार की शहादत पर शोक व्यक्त किया
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने सीआरपीएफ में अपनी सेवाएं दे रहे अशोक कुमार की शहादत पर गहरा शोक व्यक्त किया है। अशोक कुमार कांगड़ा जिले की पालमपुर तहसील के अंतर्गत धेरू गांव के रहने वाले थे और श्रीनगर में एक बड़े आतंकी हमले के दौरान शहीद हो गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के लिए अशोक कुमार के सर्वोच्च बलिदान को हमेशा याद रखा जाएगा। उन्होंने ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हुए शोक संतप्त परिजनों के साथ अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त की हैं।