श्रीखंड पहुंचने के लिए कुल्लू जिले के वाया बागीपुल मार्ग की अपेक्षा 15 किलोमीटर कम दूरी तय करनी पड़ती है, लेकिन वाया फांचा होकर श्रीखंड का रास्ता अधिक जोखिम भरा है, जिसे देखते हुए जिला प्रशासन ने इस मार्ग होकर यात्रा पर रोक लगा रखी है।
देश और प्रदेश के हजारों शिवभक्तों को इस वर्ष भी शिमला जिले के ज्यूरी से वाया फांचा श्रीखंड यात्रा पर जाने की सुविधा नहीं मिल पाएगी। मार्ग पर अधिक जोखिम और बर्फबारी के कारण सरकार की ओर से इस वर्ष भी यात्रा को हरी झंडी नहीं मिल पाई है। वर्ष 2014 से सरकार ने ज्यूरी वाया फांचा होकर श्रीखंड यात्रा पर रोक लगाई है, जिसके बाद क्षेत्र के लोग इस यात्रा को बहाल करने की लगातार मांग उठाते आ रहे हैं। 18 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित श्रीखंड महादेव के लिए वाया फांचा होकर दशकों से श्रद्धालु जाते रहे हैं।
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यहां से श्रीखंड पहुंचने के लिए कुल्लू जिले के वाया बागीपुल मार्ग की अपेक्षा 15 किलोमीटर कम दूरी तय करनी पड़ती है, लेकिन वाया फांचा होकर श्रीखंड का रास्ता अधिक जोखिम भरा है, जिसे देखते हुए जिला प्रशासन ने इस मार्ग होकर यात्रा पर रोक लगा रखी है। यात्रा शुरू करवाने के लिए क्षेत्र के डेढ़ दर्जन से अधिक युवाओं को ट्रैकिंग और गाइड का प्रशिक्षण भी दिया गया है, लेकिन मार्ग पर अधिक बर्फबारी और जोखिमों के चलते अटल बिहारी वाजपेयी माउंटेनरिंग एलायड स्पोटर्स संस्थान मनाली ने भी इस यात्रा को शुरू करने पर मनाही की है।
एबीवीआईएमएएस की अगुवाई में प्रशासन, पुलिस और पर्यटन विभाग की संयुक्त टीम ने इस मार्ग का निरीक्षण भी किया था, लेकिन मांग पर अधिक खतरा होने के कारण इस टीम ने भी इस मार्ग होकर यात्रा न करवाने की रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी, जिसके बाद शिमला जिला प्रशासन ने ज्यूरी होकर यात्रा पर रोक लगाई है। वर्ष 2006 से ज्यूरी स्थित उन्नू महादेव से श्रीखंड के लिए छड़ी यात्रा शुरू की गई थी, जो वर्ष 2014 तक ही चली। हजारों शिवभक्तों को इस वर्ष भी ज्यूरी वाया फांचा श्रीखंड यात्रा पर जाने की सुविधा नहीं हो पाएगी।
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श्रद्धालुओं को श्रीखंड जाने के लिए कुल्लू जिले के बागीपुल जाओं होकर ही जाना होगा। उधर, एसडीएम रामपुर निशांत तोमर ने बताया कि विभिन्न विभाग की संयुक्त निरीक्षण टीम ने ज्यूरी वाया फांचा श्रीखंड महादेव यात्रा को खतरों भरा बताया है। एबीवीआईएमएएस मनाली के अनुसार इस मार्ग पर स्ट्रेचर पहुंचाना तक मुश्किल है, जिसे देखते हुए यहां सर्च और रेस्क्यू करना भी मुश्किल है। उन्होंने बताया कि श्रीखंड के लिए बेहतर रास्ता न होने के कारण यहां से यात्रा करना संभव नहीं है। उन्होंने क्षेत्र के लोगों और श्रीखंड जाने वाले यात्रियों को इस मार्ग पर न जाने की सलाह दी है।