पीलिया फैलने के बाद अश्वनी खड्ड से बंद की गई पेयजल सप्लाई के चलते शहर में जलसंकट विकराल हो गया है। खड्ड से आईपीएच के जरिये मिलने वाली पेयजल सप्लाई को लेने से नगर निगम इंकार कर चुका है। लेकिन नगर निगम के पास ऐसा कोई विकल्प नहीं कि वह इस परियोजना की भरपाई कर लोगों को पानी मुहैया करवा सके। पीलिया फैलने के बाद अश्वनी परियोजना के पानी में सीवरेज की गंदगी मिक्स होने पर नगर निगम ने आईपीएच से पानी लेना बंद कर रखा है।
फिलहाल शहर के अन्य हिस्सों की पेयजल आपूर्ति का समय आधे से भी कम कर रखा है। यह सिर्फ अस्थायी व्यवस्था है ताकि शहर की जनता पीलिया के प्रकोप से बची रहे। अब तक यह व्यवस्था कारगर साबित भी हो रही है लेकिन स्कूल और कॉलेजों में जैसी ही छुट्टियां खत्म होंगी तथा अधिकतर परिवार शिमला पहुंचेंगे तो पानी की किल्लत दोगुना हो जाएगी।
अभी भी जिन क्षेत्रों की सप्लाई का समय काटकर अश्वनी परियोजना से फीड होने वाले क्षेत्रों को पेयजल आपूर्ति की जा रही है, वहां लोगों को तीसरे दिन पानी मिल रहा। नगर निगम को अभी न सही लेकिन आने वाले समय में इसी खड्ड के पानी की सप्लाई को लेना ही पड़ेगा। कोटी और ब्रांडी स्रोतों से जो साफ पानी सप्लाई करने का विकल्प सोचा जा रहा है, उसे जमीनी स्तर पर उतारने में काफी वक्त लगेगा।
वहीं यहां से सप्लाई शिमला पहुंचने पर भी अभी लंबी प्रक्रिया पूरी की जानी है। इसके बाद ही मालूम होगा कि वहां से पानी आ पाएगा या नहीं। यदि नगर निगम अश्वनी खड्ड से आईपीएच का पानी न लेने पर अड़ा रहा तो आने वाले समय में नगर निगम को पेयजल किल्लत से निपटना बड़ी चुनौति होगी।