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बौना पड़ने लगा राज्य चुनाव आयोग का कुनबा

Sun, 05 Aug 2018 01:30 PM IST
विपिन काला, अमर उजाला, शिमला
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हिमाचल प्रदेश चुनाव आयोग का कुनबा दिन प्रतिदिन बौना पड़ता जा रहा है। राज्य भर में पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव में करीब 28 हजार जन प्रतिनिधियों के चुनाव करवाने के लिए महज 30 कर्मचारी तैनात हैं।

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इनके अलावा आयोग के अध्यक्ष और सचिव भी तैनात हैं। इस पर तुर्रा यह कि पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव पंचायत स्तर पर होते हैं, लेकिन आयोग का जिला स्तर पर एक-एक कर्मचारी नियुक्त है। ये कर्मचारी दफ्तरों में लिपिक का काम भी करते हैं और डाक पहुंचाने का जिम्मा भी संभाले हैं।  

राज्य चुनाव आयोग के अफसरों और कर्मचारियों की फौज निर्वाचन विभाग के स्टाफ के आगे काफी छोटी है। राज्य के 68 विधानसभा क्षेत्रों और चार संसदीय सीटों में चुनाव कराने के लिए निर्वाचन विभाग ने प्रदेश भर में करीब 300 कर्मचारी और अफसरों की तैनाती कर रखी हैै। विधानसभा और संसदीय क्षेत्रों के चुनाव में करीब 48 लाख वोटर अपने मताधिकार का प्रयोग करते हैं।  
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राज्य चुनाव आयोग के सभी जिलों में सिर्फ एक-एक कनिष्ठ सहायक तैनात हैं। यानी 12 जिलों में कुल 12 कर्मचारी आयोग के अधीन रहकर अपनी सेवाएं प्रदान कर रहे हैं।

आयोग पंचायत स्तर तक चुनाव कराता है परंतु जिलों से नीचे स्तर पर कोई कर्मचारी तैनात नहीं है, जबकि जिलों से नीचे ब्लॉक स्तर पर भी आयोग के दफ्तर खोलने की जरूरत महसूस की जा रही है। वर्तमान समय में ब्लाक स्तर पर आयोग न तो अपने दफ्तर खोल सका है और न ही कर्मचारियों की नियुक्ति कर पाया है।  

राज्य चुनाव आयोग का सालाना बजट 2.5 करोड़
राज्य चुनाव आयोग चाहते हुए भी जिलों से नीचे ब्लॉक स्तर पर अपने दफ्तर खोलने के अलावा कर्मचारियों की तैनाती नही कर पाया है। आयोग का सालाना बजट ही 2.5 करोड़ का है। पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव कराने के लिए सिर्फ  दस करोड़ रुपये की राशि जारी की जाती है। 

क्या कहना है राज्य चुनाव आयोग के सचिव का 
राज्य चुनाव आयोग के सचिव सुरजीत सिंह राठौैर का कहना है कि आयोग पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव में जिले की मशीनरी की सेवाएं लेता है। बजट भी जरूरत के अनुसार सरकार से लिया जाता है।

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