बोले, हम पर बनाया गया था दबाव, मौके देनी पड़ी नामों पर सहमति
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी में कारोबारियों के सबसे बड़े संगठन शिमला व्यापार मंडल का बिना चुनाव करवाए सर्वसम्मति से गठन करने वाले कारोबारी नेताओं ने अब अचानक अपने फैसले पर यू टर्न ले लिया है।
शिमला व्यापार मंडल में पद न मिलने से बौखलाए कुछ कारोबारी नेता अब फिर 12 सितंबर को चुनाव करवाने पर अड़ गए हैं। 31 अगस्त को नाम वापसी के आखिरी दिन इन्हीं कारोबारी नेताओं ने शिमला व्यापार मंडल की नई कार्यकारिणी का गठन किया था। बाकायदा उस बैठक में यह कारोबारी मौजूद थे। लेकिन गठन के अगले ही दिन इनके सुर बदल गए। वीरवार को फिर इन कारोबारियों ने बैठक की।
आरोप लगाया कि चुनाव कमेटी ने मनमाने तरीके से व्यापार मंडल का गठन किया है। दावा किया कि उन्होंने नाम वापसी के फार्म पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। ऐसे में वह अभी भी चुनाव मैदान में हैं। चुनाव कमेटी को 12 सितंबर को चुनाव करवाना ही होगा। कहा कि नामांकन भरने वाले कई कारोबारियों ने अभी तक नाम वापस नहीं लिया है। कुछ कारोबारी नेताओं के अचानक सुर बदलने से शहर के कारोबारी परेशान हैं। कारोबारियों का कहना है कि व्यापार मंडल के नाम पर कुछ कारोबारी नेता अपनी राजनीति चमका रहे हैं।
बैठक का माहौल खराब कर हुआ गठन
कारोबारी नेताओं का कहना है कि उन्हें नाम वापसी के आखिरी दिन एक बैठक के लिए बुलाया था। बैठक में व्यापार मंडल अध्यक्ष का चुनाव सर्वसम्मति से करने को कहा गया। इसी दौरान एक प्रत्याशी के पक्ष में कई व्यापारी बैठक में पहुंच गए थे। इससे बैठक का माहौल खराब हो गया। इसी दबाव में यह गठन स्वीकार करना पड़ा। कारोबारी नेता एवं अध्यक्ष पद के दावेदार संजीव ठाकुर और कंवलजीत सिंह ने कहा कि उन्होंने नाम वापसी के परिपत्र पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। ऐसे में चुनाव करवाए जाएं।
अब नहीं बदलेगा फैसला : मिनोचा
चुनाव कमेटी अध्यक्ष अश्वनी मिनोचा ने कहा कि बैठक में मौजूद सभी कारोबारी नेताओं की सहमति से व्यापार मंडल का गठन किया था। कहा कि जो कारोबारी नाम वापस न लेने का दावा कर रहे हैं, उन्होंने बाकायदा सर्वसम्मति से व्यापार मंडल चुनने के लिए बने पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं। अब फैसला नहीं बदलेगा। व्यापार मंडी अध्यक्ष हरजीत मंगा ने कहा कि कारोबारियों पर बैठक में कोई दबाव नहीं बनाया गया। यह आरोप गलत है।