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शिमला: सीएम सुक्खू बोले- केरलम को 14.50 रुपये प्रति यूनिट बिजली बेचेगा हिमाचल

Mon, 21 Sep 2026 10:46 AM IST
Ankesh Dogra अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।

सार

शिमला में एलर्जली फेज-दो में नए मुख्यमंत्री कार्यालय का उद्घाटन करने के बाद मीडिया से अनौपचारिक बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि व्यवस्था परिवर्तन की दिशा में सरकार के प्रयासों के परिणाम सामने आने लगे हैं। 
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उद्घाटन से पहले सचिवालय के बाहर कर्मचारी जुटे। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश अपनी बिजली की कीमत खुद तय करेगा। केरलम सरकार को बिजली बेचने के लिए 14.50 रुपये प्रति यूनिट की दर तय की जा रही है। वहीं, तमिलनाडु को फिलहाल 13.50 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली बेची जा रही है। मार्च के बाद तमिलनाडु के लिए भी बिजली की दर संशोधित की जाएगी। शिमला में एलर्जली फेज-दो में नए मुख्यमंत्री कार्यालय का उद्घाटन करने के बाद मीडिया से अनौपचारिक बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि व्यवस्था परिवर्तन की दिशा में सरकार के प्रयासों के परिणाम सामने आने लगे हैं। सरकार के प्रयासों से वर्ष 2032 में हिमाचल देश का सबसे अमीर राज्य बनकर उभरेगा। उस समय सभी तरह के खर्च निकालने के बाद प्रदेश सरकार की वार्षिक आय सात हजार करोड़ रुपये से अधिक होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले राज्य विद्युत बोर्ड पांच से साढ़े पांच रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली बेचता था। अब बिजली की बिक्री का जिम्मा ऊर्जा निदेशालय संभालेगा। पीक टाइम में बिजली की मांग के अनुसार अधिक दर पर बिजली बेचकर प्रदेश की आय बढ़ाई जाएगी।

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अगले कुछ महीनों में कर्मचारियों को मिलेगा बकाया
सीएम ने कहा कि कर्मचारियों के लंबित वित्तीय लाभ के भुगतान को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि पेंशनरों को भुगतान के बाद कर्मचारियों के बकाया वित्तीय लाभ भी चरणबद्ध तरीके से जारी किए जाएंगे। अगले कुछ महीनों में कर्मचारियों को उनका बकाया भुगतान कर दिया जाएगा।
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पंचकूला की प्यास बुझाने के लिए सुरंग से पानी पहुंचाने की तैयारी
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा के पंचकूला के शहरी और औद्योगिक क्षेत्र की पेयजल जरूरत पूरी करने के लिए हिमाचल सरकार संभावनाएं तलाश रही है। सुरंग के माध्यम से पंचकूला तक पानी पहुंचाने की योजना पर विचार किया जा रहा है। ऐसा कोई प्रतिबंध नहीं है कि हिमाचल सतलुज नदी के पानी का अपने हित में इस्तेमाल नहीं कर सकता। प्रदेश सरकार अपने जल संसाधनों के इस्तेमाल और पानी बेचने के लिए स्वतंत्र है। इसी को देखते हुए दूसरे राज्यों को पानी बेचने की संभावनाओं पर भी सरकार मंथन कर रही है।
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