पेयजल संकट से जूझ रहे लोगों का सब्र आखिरकार शुक्रवार को टूट गया। आक्रोशित लोगों ने दोपहर बाद महापौर कार्यालय के बाहर खाली बाल्टियां लेकर धरना दिया। शहर के टुटू क्षेत्र के लोगों ने आरोप लगाए कि नगर निगम दस दिन से उन्हें पानी की सप्लाई नहीं दे पाया है। इस वजह से उनके पास पीने तक का पानी नहीं बचा है। शिमला नागरिक सभा टुटू इकाई के प्रतिनिधिमंडल ने सैकड़ों लोगों के साथ खाली बर्तन लेकर दोपहर साढ़े तीन बजे महापौर कार्यालय में दस्तक दी और धरना शुरू किया।
धरने में संजौली, मैहली और कैथू के लोग भी शामिल हुए। शिमला नागरिक सभा के संयोजक विजेंद्र मेहरा और टुटू इकाई के सचिव हेमराज चौधरी ने बताया कि टुटू में नगर निगम एक सप्ताह और आईपीएच दस दिन बाद भी पानी नहीं दे पाया है। शहर में 16 से 17 एमएलडी पानी हर रोज आ रहा है। इससे शहर के लोगों को हर तीसरे दिन पानी की सप्लाई दी जा सकती है। नगर निगम शहर के चुनिंदा वीआईपी इलाकों और कालोनी में पानी की बंदरबांट कर रहा है।
उन्होंने नगर निगम से मांग की है कि पानी के इस भयंकर संकट में वह शिमला जल प्रबंधन निगम लिमिटेड से बेहतर तालमेल बैठाए और नियमित पानी उपलब्ध करवाया जाए। कहा कि अगर पानी की आपूर्ति नहीं हुई तो नागरिक सभा उग्र आंदोलन करेगी। इस अवसर पर कुंदन शर्मा, बाबू राम, बालक राम, कमल शर्मा, अंकुश, अमन, टेकचंद, संदीप दिशु, पवन और राम प्रकाश मौजूद रहे।
शहर से सटी मैहली पंचायत में 15 दिन से पीने के पानी की आपूर्ति नहीं हुई है। पंचायत के मैहली, चैली समेत साथ लगते इलाकों के हजारों लोग पानी खरीदने को मजबूर हैं। पेयजल आपूर्ति सुचारू न होने पर शुक्रवार को पंचायत प्रधान सुरेंद्र गर्ग की अध्यक्षता में लोग मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से मिले। प्रधान सुरेंद्र गर्ग, स्थानीय निवासी विनोद वर्मा, रजनीश वर्मा ने कहा कि कंपनी इस क्षेत्र में जलशक्ति विभाग के टैंक में पानी देती है।
इसके बाद विभाग इसे आगे बांटता है। लेकिन 15 दिन से कंपनी ने विभाग को कोई पानी नहीं दिया है। पंचायत के लोगों ने मैहली जुन्गा साधुपुल से कंडाघाट तक की सड़क चौड़ी करने, मैहली स्कूल को उत्कृष्ट स्कूल बनाने की भी मांग रखी। मुख्यमंत्री ने इनकी मांगें सुनीं और बाद में अधिकारियों के साथ हुई बैठक में पेयजल पर रिपोर्ट ली। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मैहली के लोगों को पीने का पानी तुरंत मुहैया करवाया जाए।