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चलती कार में दुष्कर्म मामले में पीड़िता ने फोन पर अमर उजाला को बताया दर्द

Wed, 15 May 2019 12:27 PM IST
Krishan Singh चैतन्य ठाकुर, अमर उजाला, शिमला
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शिमला शहर में 28 अप्रैल को चलती कार में युवती से दुष्कर्म मामले में नया मोड़ आ गया है। पीड़िता ने अमर उजाला से संपर्क कर पुलिस की जांच पर संदेह प्रकट कर दिया है।

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पीड़िता के अनुसार मामला दबाने को लेकर वह पुलिस के दबाव में थी, लेकिन उसके गांव जाकर पुलिस ने जब उसके चरित्र हनन की कोशिश की तो उसे इस तरह अपनी बात रखनी पड़ी। पीड़िता ने कहा कि जिस स्केच पर एसआईटी जांच बढ़ा रही है, वह आरोपी का है ही नहीं।

स्केच आरोपी के चेहरे से सिर्फ 40 फीसदी मेल खाता है। स्केच किसी युवक का है, जबकि आरोपी अधेड़ था। स्केच जारी करने से पहले पुलिस ने उससे नहीं पूछा। इसलिए उसे इंसाफ मिलने की उम्मीद नहीं है।

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करीब 22 बार उसके बयान लिए

पुलिस ने करीब 22 बार उसके बयान लिए, उसके दोस्तों को जेल में डालने की धमकी दी। माता-पिता को हरियाणा से यहां बुलाने के नाम पर ब्लैकमेल किया। पुलिस मेरा टॉर्चर कर रही है। नीट की तैयारी कर रही थी।

परीक्षा के बाद वह हरियाणा आ गई है। अब हिमाचल पुलिस उसके चरित्र हनन करने पर उतर आई है। वह जहां रहती है, वहां के पार्षद और लोगों को थाने बुलाकर मेरे चरित्र के बारे में पूछा जा रहा है।  

पढ़ाई में मेधावी छात्रा रही पीड़िता ने ये कहा

पढ़ाई में मेधावी छात्रा रही पीड़िता ने कहा कि मुझे कॅरिअर बनाना है, मैं झूठ क्यों कहूंगी कि मेरे साथ दुष्कर्म हुआ। पुलिस ने मुझे मानसिक तौर पर इतना प्रताड़ित कर दिया था कि मैं अदालत में बयान से मुकर गई।

एडीएम ने मेरे घर आकर मेरे बयान लिए और मेरे हस्ताक्षर भी लिए। मेरा बयान लेने के बाद आज तक उन पुलिस वालों पर कार्रवाई नहीं हुई और न आरोपी पकड़ा गए।

अब यकीन है कि पुलिस मुझे गलत ठहरा कर केस बंद कर देगी, क्योंकि हिमाचल में अभी चुनाव होने हैं। पुलिस कह रही है कि तुमने सुनियोजित तरीके से झूठा मामला दर्ज करवाया है।

क्या कहते हैं एसआईटी प्रमुख 

उसके और दोस्तों के मोबाइल जब्त किए गए, सारी डिटेल खंगाली, लेकिन पुलिस को कुछ नहीं मिला। एसआईटी के एएसपी तीन दिन में केस सुलझाने की बात करते थे, लेकिन अभी तक आरोपी पकड़ से दूर है। 

एसआईटी प्रमुख एएसपी प्रवीर ठाकुर ने कहा कि एफआईआर में दर्ज शिकायत से मामला मेल नहीं खा रहा है। लड़की को सुरक्षित हरियाणा पहुंचाने पुलिस जरूर गई थी, लेकिन उसके चरित्र के बारे में कोई तहकीकात नहीं की और न कोई टीम भेजी। स्केच लड़की के बयान पर ही तैयार किया है। हर पहलू पर छानबीन की जा रही है। 

पीड़िता के पुलिस पर आरोप 

- पुलिस बार-बार कर रही परेशान, 22 बार हो चुकी पूछताछ
- हरियाणा पहुंचकर हिमाचल पुलिस ने पिता और ताया को थाने बुलाकर पूछा मेरा चरित्र
- जांच के बहाने पुलिस ने 10 दिन तक किया परेशान, घर भी नहीं जाने दिया
- जांच में सहयोग नहीं करोगी तो, शिमला के दोस्त को जेल में डालेंगे
- घटना के बाद पुलिस तीन दिन बाद तलाश पाई मौके से मोबाइल
- 1 मई की रात नौ बजे थाने में बुलाकर बनाया आरोपी का स्केच, एक बार भी नहीं पूछा कि क्या यही आरोपी है।
- पुलिस ने मुझे नहीं दिखाई कोई सीसीटीवी फुटेज
- पुलिस ने मना किया था किसी को कुछ भी बताने से, हरियाणा महिला आयोग कर रहा है संपर्क 
-- पुलिस ने मुझ पर लगाए आरोप- कहा पीड़ित पैसे के चक्कर में कर रही यह सब कुछ  
- अस्पताल जाने के बाद साढ़े तीन घंटे इंतजार करने के बाद किया मेडिकल, पेन किलर तक नहीं दी
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ये भी उठ रहे हैं सवाल

- इस मामले में लड़की दुष्कर्म का आरोप किसी अज्ञात व्यक्ति पर लगा रही है। अगर उसकी मंशा किसी को झूठे केस में फंसाने की होती तो वह किसी का नाम ले लेती?
- इस मामले में एक चश्मदीद भी सामने आया है जिस हालत में उसने लड़की को देखा तो वह भी घबरा गया। क्या कोई सामान्य लड़की रात को आधे वस्त्रों में मदद के लिए चिल्लाती?
- प्रदेश सरकार ने इस मामले में 30 अप्रैल को मजिस्ट्रियल जांच के आदेश देकर 24 घंटे के अंदर रिपोर्ट तलब की। रिपोर्ट सरकार के पास पहुंची, लेकिन आज तक एक्शन नहीं लिया। 
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