मिनी सचिवालय सोलन में आपराधिक मामलों पर आयोजित बैठक में डीजीपी एसआर मरडी ने पहली बार शिमला में युवती से दुष्कर्म मामले में पुलिस जांच को सामने रखा। उन्होंने कहा कि फोरेंसिक रिपोर्ट में युवती से दुष्कर्म के कोई भी सबूत नहीं मिले हैं।
न ही जांच में अपहरण के कोई साक्ष्य मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि लड़की के बयान मौजूदा हालात से मेल नहीं खा रहे हैं। चर्चा में रहने के लिए लड़की पहले भी इस तरह के आरोप और बयान दे चुकी है। उन्होंने कहा कि जांच जारी है उसके बाद सब कुछ स्पष्ट हो जाएगा।
बैठक में डीजीपी ने कहा कि सेंटर फॉर स्टडी डेवलपमेंट सर्वे के अनुसार पुलिस पर विश्वास में हिमाचल पुलिस प्रथम स्थान पर आई है। पुलिस उच्चाधिकारियों पर विश्वास में भी पुलिस को दूसरा स्थान मिला है। बैठक में पांच जिला सोलन, शिमला, किन्नौर, बद्दी, सिरमौर के एसपी, डीएसपी, एसएचओ सहित अन्य अधिकारियों ने हिस्सा लिया।
डीजीपी मरडी ने कहा कि पूरे साल में तीन किलो हेरोइन और 115 किलो चरस को पकड़ने में सफलता मिली है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में अपहरण के मामलों में कमी आई है। पांवटा साहिब से 45 हजार डेमाड्रोल के कैप्सूल पकड़े हैं। पांच जिलों में पिछले वर्ष हत्या के 31 मामले थे जबकि 16 केस दर्ज हैं।
वहीं हत्या के प्रयास के पिछले वर्ष 14 मामले थे। जो इस वर्ष बढ़कर 16 तक पहुंच चुके हैं। चोरी के मामलों में गिरावट आई है। बलात्कार के मामले भी कम हुए हैं। उन्होंने बताया कि कर्मचारियों की संख्या को बढ़ाने के लिए सरकार को प्रस्ताव भेजा है। उन्होंने बताया कि अब ई-चालान को शुरू करेगी जिसमें दो से अधिक बार चालान होने पर तीसरी बार लाइसेंस को रद्द किया जाएगा।