वर्तमान में जो फोरलेन स्वीकृत हैं और जिन पर काम चल रहा है, इनका कार्य पूरा होने के बाद इस योजना को अमलीजामा पहनाया जाएगा। फोरलेन निर्माण के लिए 45 मीटर चौड़ी जमीन का अधिग्रहण करना होता है, जबकि डबल लेन सड़क 24 मीटर चौड़ी होती है।
पहाड़ी इलाकों में कई जगह टू लेन सड़क की चौड़ाई इससे भी कम है। इसका कारण यह है कि अगर पहाड़ों के साथ छेड़छाड़ की जाती है तो उनके दरकने की आशंका रहती है। शिमला-कालका फोरलेन निर्माण कार्य मेें भी ये दिक्कतें पेश आ रही हैं। सड़क चौड़ा करने पर पहाड़ियां सड़क पर आ रही हैं।
हिमाचल के पहाड़ी इलाकों में टू लेन सड़कों को फोरलेन में तबदील करना मुश्किल है। पहाड़ियां खिसकने की आशंका रहती है। ऐसे में सरकार टू लेन को फोरलेन में तबदील करने की जगह अलग से टू लेन सड़क का निर्माण कर सकती है। इसका प्रस्ताव तैयार किया है। - बीके अग्रवाल, मुख्य सचिव