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शिमला रेप केस: लॉकअप में सूरज की मौत का खुला राज, हत्या के बाद भी किए वार

Fri, 01 Sep 2017 02:03 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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गुड़िया प्रकरण में आरोपी सूरज की हत्या में कई खुलासे हो रहे हैं। सूरज की हत्या के आधे घंटे बाद उसका गला दबाया गया और गुप्तांग पर भी वार किए गए। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सूरज की मौत सिर पर किसी सख्त चीज के वार से हुई है। 
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माना जा रहा है कि हत्यारे मौत की असल वजह को छिपाना चाहते थे इसलिए उसका गला घोंटा और गुप्तांग पर भी वार किए। यह जांच अभी चल रही है कि हत्यारे मौत की असल वजह को क्यों छिपाना चाहते थे।  

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गले पर आए नीले रंग के निशान भी मरने के बाद के हैं जबकि सूरत की मौत एक से आधा घंटा पहले हो चुकी थी। पोस्टमार्टम के दौरान सूरज के शरीर की तीन पोस्टमार्टम रिपोर्ट बनाई गई हैं।
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रिपोर्ट के साथ 72 फोटो अटैच किए गए हैं। इसकी एक कॉपी सीबीआई अपने साथ ले गई है जबकि दूसरी जज और तीसरी आईजीएमसी पोस्टमार्टम विभाग के पास है। फोरेंसिक लैब जुन्गा को भी इसकी ई-मेल की गई है। 

जज और पुलिस की निगरानी में हुआ था पोस्टमार्टम
सूरज के शरीर का पोस्टमार्टम जज और पुलिस की निगरानी में हुआ है। सूत्र बताते हैं कि डॉक्टर ने पहले जज और पुलिस को आईजीएमसी आने का आग्रह किया। उनके आने के बाद ही आईजीएमसी में 4 से 5 घंटे तक पोस्टमार्टम चलता रहा। 

पुलिस ने गढ़ी फर्जी कहानी, संतरी से कहा- साइन न किए तो फंसोगे

सीबीआई को दिए संतरी के बयान के बाद अब पुलिस की वो झूठी कहानी भी सामने आ गई है, जिसे लॉकअप में सूरज की हत्या के बाद गढ़ा गया। 19 जुलाई को दर्ज एफआईआर में पुलिस ने संतरी का बयान लिखा कि गुड़िया प्रकरण के मुख्य आरोपी राजू ने दूसरे आरोपी सूरज की उसके सामने बुरी तरह से पिटाई कर दी।

जबकि संतरी ने सीबीआई को बताया कि यह झूठ है। उसके सामने राजू लॉकअप में अकेला था। उससे पुलिस वालों ने जबरन बयान पर साइन कराए हैं। उसे कहा गया- साइन करो नहीं तो फंसोगे। संतरी के बयान में पुलिस ने लिखा- मैं वर्तमान में पुलिस थाना कोटखाई में बतौर आरक्षी सामान्य ड्यूटी पर कार्यरत हूं।

पुलिस थाना कोटखाई मेंअभियोग संख्या 97/17 दिनांक 6 जुलाई 2017 को धारा 302, 376 आईपीसी और पोस्को एक्ट की धारा 4 में दिनांक 13 जुलाई 2017 को आरोपी राजू, सूरज, लोकजन उर्फ छोटू, सुभाष, दीपक उर्फ दीपू गिरफ्तार किए गए थे। 

तो ये बनाई गई सूरज हत्याकांड की कहानी

इनमें से पिछले कल मेरी पहरा हवालात संतरी की ड्यूटी थी। कोटखाई थाने के हवालात में उस समय तीन आरोपी बंद थे। ये राजेंद्र उर्फ राजू, सूरज और सुभाष चंद थे। दो आरोपी लोकजन उर्फ  छोटू और दीपक को एहतियात के तौर पर ठियोग थाने की हवालात में भेजा गया था।

पिछली कल रात को उसकी संतरी की ड्यूटी 9 से 12 बजे के बीच थी। आरोपी सुभाष को करीब 11:25 बजे रात को हवालात से निकालकर ऊपर एक कमरे में पूछताछ के लिए ले जाया गया। करीब पौने 12 बजे जब वह संतरी ड्यूटी पर तैनात था, उस वक्त आरोपी राजू और सूरज जो कि हवालात में बंद थे, दोनों आपस में खुुसर-पुसर करने लग गए थे। 

अचानक आरोपी राजेंद्र ने सूरज को पीटना शुरू कर दिया, जिस पर मैंने जोर से आवाज देकर राजू को बोला कि इसको क्यों मार रहा है, मगर वह नहीं रुका। मैं तुरंत एमएचसी से चाबी लेने आ गया था और रात्रि ड्यूटी पर तैनात आरक्षी मुकेश कुमार ने आरोपी राजू को सूरज की मारपीट से पीछे हटाया।

झूठा है बयान, मेरे सामने राजू ने नहीं की सूरज से मारपीट

उसके बाद उसने तुरंत ऊपर थाना प्रभारी राजेंद्र सिंह को ऊपरी मंजिल के कमरे में जाकर बताया। उस पर थाना प्रभारी तुरंत नीचे हवालात में आए, मगर उस वक्त राजू की मारपीट के कारण वह फर्श पर अचेत अवस्था में पड़ा हुआ था। राजू की मारपीट से उसके मुंह के दाहिने तरफ, दाहिनी आई ब्रौ आदि पर चोटें आईं।

इसके बाद थाना प्रभारी राजेंद्र सिंह सूरज को कोटखाई अस्पताल ले गए। वहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित किया। आरोपी राजेंद्र सिंह की ओर से हवालात के भीतर की गई मारपीट के कारण उसकी मौत हो गई। उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। पुलिस थाना प्रभारी ने उसका यह बयान सीआरपीसी की धारा 154 के तहत दर्ज किया। लॉकअप हत्याकांड की यह एफ आईआर दिनेश कुमार के नाम से ही दर्ज की गई। 
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सबसे पहले छोटे मामा ने दी थी पुलिस को सूचना

कोटखाई के रहने वाले गुड़िया के मामा के नाम से ही इस प्रकरण की पुलिस थाने कोटखाई में छह जुलाई को एफआईआर दर्ज हुई। मामा ने एफआईआर दर्ज करने के लिए बयान दिया था कि पांच जुलाई को उसके जीजा ने करीब रात नौ बजे सूचना दी कि गुड़िया स्कूल से घर नहीं पहुंची है।

उसकी तलाश करने के लिए छह जुलाई को गुड़िया के पिता करीब साढे़ सात बजे पता करते हुए हलाइला जंगल की ओर निकले। एक कुत्ता सड़क के पास नीचे दौड़ता हुआ गया तो नीचे खाई मेें उनकी नजर पड़ी। वहां स्कूल ड्रेस के साथ ही गुड़िया की लाश नग्न अवस्था में पड़ी हुई थी। ऐसा लगा कि किसी नामूल व्यक्ति ने उसके साथ गलत कर उसे मार दिया।

मामा ने बताया कि उसके भाई यानी गुड़िया के दूसरे मामा ने यह सूचना पुलिस को दी। जीजा यानी गुड़िया के पिता को भी उन्होंने सूचना दी। हमें किसी पर शक नहीं है, मगर गलत करने वालों पर कड़ी कार्रवाई करें। मामा के इस बयान को कलमबंद करने के बाद थाना प्रभारी राजेंद्र सिंह ने आईपीसी की धारा 302 और 376 के तहत दर्ज किया। पोस्को एक्ट की धारा 4 भी लगाई गई है।
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