हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में मंगलवार को लोकल रूटों पर निजी बसें के पहिये आज थमे रहे। प्रदेश सरकार और परिवहन विभाग की ओर से मांगें न मानने पर निजी बस चालक-परिचालक यूनियन एक दिवसीय हड़ताल पर रहे। ऐसे में सुबह से यात्रियों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। विशेषकर कर्मचारियों, विद्यार्थियों को भारी दिक्कतें झेलनी पड़ी हैं। लोग पैदल ही अपने गंतव्य तक पहुंचे। शहर के बस स्टैंड में बसों के लिए यात्रियों की भीड़ लगी रही। शिमला में चआरटीसी बसों की संख्या सीमित है। इसके चलते इनमें भी भारी भीड़ रही।
शहर में लोकल रूटों पर करीब 106 निजी बसें हड़ताल पर रहीं। निजी बस चालक-परिचालक यूनियन के अध्यक्ष रूपलाल ठाकुर और महासचिव अखिल गुप्ता ने बताया कि एक साल से यूनियन प्रदेश सरकार के समक्ष अपनी मांगें उठा रही हैं लेकिन सरकार गंभीर नहीं है। 11 जुलाई को यूनियन ने सांकेतिक हड़ताल का एलान किया था लेकिन आरटीओ शिमला के आश्वासन के बाद हड़ताल टाल दी। आरटीओ के आश्वासन के बावजूद कोई राहत नहीं मिली। 5 अगस्त को यूनियन ने डीसी शिमला को मांगों को लेकर ज्ञापन और हड़ताल का नोटिस दिया था बावजूद इसके गंभीरता से नहीं लिया।
अनिश्चितकालीन हड़ताल करेंगे
प्रदेश में चल रही करीब 3300 निजी बसों में स्थायी और अस्थायी रूप से सेवाएं दे रहे चालक-परिचालक सितंबर में अनिश्चितकालीन हड़ताल करेंगे। मंगलवार को शहर की निजी बसों की हड़ताल के बाद यूनियन ने यह फैसला लिया। यूनियन ने परिवहन निदेशालय के बाहर प्रदर्शन किया। अध्यक्ष रूपलाल ठाकुर और महासचिव अखिल गुप्ता ने बताया कि सरकार उनके प्रति पूरी तरह असंवेदनशील है। निजी बसों में सेवाएं दे रहे करीब 10,000 चालक-परिचालकों की अनदेखी हो रही है। पिछले दो सालों से पांच सूत्रीय मांगपत्र को पूरा करने के लिए सरकार से गुहार लगा रही है। 5 अगस्त को उपायुक्त शिमला को मांगों को लेकर ज्ञापन और हड़ताल का नोटिस दिया था। शिमला निजी बस आपरेटर यूनियन ने भी मंगलवार को हुई हड़ताल को समर्थन दिया। यूनियन के उपाध्यक्ष प्रदीप शर्मा प्रदर्शन में भी शामिल हुए।
यह हैं यूनियन की मांगें
एचआरटीसी चालक-परिचालक भर्ती में निजी बसों के अनुभवी स्टाफ को 50 फीसदी कोटा दें
परिवहन विभाग की ओर से आई कार्ड जारी करें
मेडिकल सुविधा उपलब्ध करवाई जाए
बस स्टैंड में रेस्ट रूम की सुविधा दी जाए
निजी बसों को बस स्टैंड में काउंटर टाइम दिए जाएं, ताकि आपसी विवाद न हो
एचआरटीसी संयुक्त समन्वय समिति ने दिया समर्थन
प्राईवेट बस चालकों-परिचालकों की मांगों का एचआरटीसी संयुक्त समन्वय समिति ने समर्थन का एलान किया है। समिति के सचिव खेमेंद्र गुप्ता ने कहा है कि सरकार ने इनका भविष्य सुरक्षित करने के लिए कोई नीति नहीं बनाई है। इस कारण बस ऑपरेटर इनका शोषण कर रहे हैं। निजी बस चालकों-परिचालकों को न्यूनतम वेतन सहित ओवर टाइम, साप्ताहिक अवकाश भी दिया जाना चाहिए। प्राइवेट बसों में लॉग बुक होनी चाहिए जिससे दिनचर्या एवं कार्य दिवसों की गणना हो सके। निजी बस चालकों-परिचालकों को एचआरटीसी भर्ती में आरक्षित कोटा दिया जाना चाहिए ऐसा करने से निगम को अनुभवी चालक व परिचालक मिलेंगे।