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MC SHIMLA: मर्ज एरिया पर हंगामा, सदन छोड़कर चले गए पार्षद

Fri, 28 Jul 2017 04:36 PM IST
अशोक चौहान/अमर उजाला, शिमला
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नगर निगम की मासिक बैठक में पार्षद निधि, ई-गवर्नेंस जैसे अहम प्रस्ताव पारित हो गए। सदन में जहां इन दोनों प्रस्तावों पर सबने सहमति जताई वहीं, न्यू मर्ज एरिया को लेकर हंगामा भी बरपा। डिप्टी मेयर राकेश शर्मा समेत कई पार्षदों ने इन एरिया के लिए ज्यादा बजट देने की मांग की।
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इस मामले पर विवाद इतना बढ़ गया कि पार्षद सत्या कौंडल ने बीच में ही वॉकआउट कर दिया। संजौली चौक से पार्षद सत्या कौंडल का कहना था कि उनके वार्ड में तीन कॉलोनियां ऐसी हैं जो न्यू मर्ज एरिया में आती हैं। यहां कोई सुविधा नहीं है। निगम इसके लिए ज्यादा बजट जारी करे।

इस पर संयुक्त आयुक्त ने कहा कि मौके पर जाकर देखा जाएगा कि ये कॉलोनी मर्ज एरिया के तहत आती भी है या नहीं। साथ ही मर्ज एरिया के लिए पैसा जारी करने का प्रस्ताव सरकार को भेजने की बात भी कही। लेकिन अधिकारी के जवाब से असंतुष्ट पार्षद ने वॉकआउट कर दिया।
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डिप्टी मेयर राकेश शर्मा ने भी मर्ज एरिया को लेकर भेदभाव की बात कही। कहा कि नगर निगम में 21 साल पहले शामिल हुए कई इलाके ऐसे हैं जो अभी भी पिछड़े हैं। मीरा ने कहा कि मर्ज एरिया के लिए ज्यादा बजट का प्रावधान करना होगा। बाद में इस पर सदन ने तय किया कि इस मामले को सरकार को भेजा जाएगा।

सदन में ये प्रस्ताव हुए पारित
निगम के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को 200 से बढ़ाकर 210 रुपए दैनिक वेतन राशि देने, सैहब कर्मचारियों को पीपीई के तहत ग्लब्ज, रेनकोट आदि देने और निगम में जूनियर ऑफिस असिस्टेंट तथा डाटा एंट्री ऑपरेटर के 20 पद भरने के प्रस्ताव सदन में पारित किए गए। 

स्मार्ट सिटी बनाना है या स्ट्रीट सिटी: किमी सूद
शिमला। बैनमोर की पार्षद किमी सूद ने तहबाजारियों का मामला सदन में उठाया। कहा कि हमें शिमला को स्मार्ट सिटी बनाना है, स्ट्रीट सिटी नहीं। कहा कि तहबाजारियों का पंजीकरण हो और इनके लिए जगह तय हो। आयुक्त ने कहा कि इन पर नीति बना ली है जो जल्द लागू होगी। 

साथ ही कहा कि 2016 में हुई वीडियोग्राफी के दौरान जो तहबाजारी छूट गए हैं और जिन्होंने पहले आवेदन किया था, उन्हें फिर से पंजीकरण का मौका दिया जाएगा। पार्षद आरती चौहान ने भी संजौली में शाम पांच बजे के बाद टनल तक तहबाजारियों का मामला उठाया। आयुक्त ने कहा कि शुक्रवार से ही इन पर कार्रवाई शुरू की जाएगी।

सीवरेज लाइन ठीक न की तो धरना दूंगी

जाखू से पार्षद अर्चना धवन ने कहा कि उनके वार्ड में सीवरेज लाइन टूटी हैं। उसे तुरंत ठीक करो नहीं तो मैं धरना दे दूंगी। पटयोग पार्षद आशा शर्मा ने भी वार्ड में सीवरेज लाइनें ठीक करवाने को कहा। 

उन्होंने न्यू शिमला पार्षद कुसुमलता के साथ इस एरिया में कुत्तों के आतंक का मामला भी सदन में रखा। सत्या कौंडल ने ढींगूधार में बन रहे टैंक का मामला उठाया। कहा कि तीन साल बाद भी टैंक नहीं बना। बाद में प्रशासन ने फरवरी तक इसका काम पूरा करने की समयावधि तय की।

हंगामे पर मेयर ने लगाई फटकार
तहबाजारियों के मामले पर सदन में तीखी बहस हुई। एकसाथ सभी पार्षद बोलने लगे। इस पर मेयर कुसुम सदरेट भड़क गई। कहा कि एक-एक कर अपनी बात रखें। साथ ही ये भी कहा कि आज तक इनका मामला क्यों नहीं उठाया गया। सदन की शुरुआत में गुड़िया के लिए दो मिनट का मौन भी रखा गया।

पार्षद-डिप्टी मेयर में तीखी बहस
कूड़ा उठाने के मुद्दे पर पार्षद मीरा और डिप्टी मेयर में तीखी बहस हुई। पार्षद का कहना था कि उनके वार्ड में शाम पांच बजे कूड़ा उठता है। फोन करो तो अफसर सुनते नहीं।

इस पर डिप्टी मेयर ने कहा कि हमें ऐसी ही विरासत मिली है, हमें इसे सुधारना है। इससे पार्षद भड़क गई और कहा कि ये क्या जवाब हुआ, ऐसे तो हमारे काम होंगे ही नहीं। बाद में अफसरों ने वार्ड में सुबह के समय कूड़ा उठाने का भरोसा दिया।

कागजों में दर्जनों कर्मचारी, पर वार्ड में दिखते नहीं
पार्षदों ने पूछा कि कागजों में तो उनके वार्ड में सैहब और लेबर के दर्जनों कर्मचारी हैं मगर फील्ड में कम ही दिखते हैं। इनकी सूची उपलब्ध करवाई जाए। 

निगम की चारों कमेटियां भी गठित की
मासिक बैठक में महापौर ने निगम की चारों कमेटियों के लिए पार्षदों का चुनाव भी किया। इनमें साधारण कृत्यकारक समिति में पार्षद अर्चना धवन, बिट्टू कुमार, किरण बाबा और राकेश चौहान चुने गए हैं। 

वित्त संविदा और योजना समिति में आनंद कौशल, संजय परमार, सत्या कौंडल और तनुजा चौधरी निर्विरोध सदस्य चुने गए। सामाजिक न्याय समिति  में पार्षद रचना भारद्वाज, शारदा चौहान, आशा शर्मा और बृज सूद चुने गए जबकि कर समिति में सुषमा कुठियाला और विवेक शर्मा सदस्य होंगे।
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पार्षद निधि बहाल, ई-गवर्नेंस प्रोजेक्ट को मिली मंजूरी

नगर निगम के पार्षदों के लिए भी अब अलग निधि का प्रावधान होगा। निगम प्रशासन ने पार्षद निधि को फिर से बहाल करने का फैसला लिया है। इसके तहत प्रत्येक पार्षद को 25-30 लाख रुपए का बजट प्रतिवर्ष दिया जाएगा। लेकिन इसके लिए पहले गाइडलाइन्स तैयार की जाएंगी।

निगम की मासिक बैठक में वीरवार को कृष्णानगर वार्ड के पार्षद बिट्टू कुमार ने पार्षद निधि की मांग करते हुए कहा कि बरसात के मौसम में डंगे गिरने, रास्ते टूटने जैसे कई ऐसे काम होते हैं जिन्हें तत्काल करवाने की जरूरत पड़ती है। लेकिन पैसा न होने से पार्षद ये काम खुद नहीं करवा सकते।

निगम की लंबी टेंडर प्रक्रिया के तहत इन्हें करवाना पड़ता है। इसके लिए पार्षद निधि का प्रावधान होना चाहिए। पार्षद शैली शर्मा और अर्चना धवन ने भी 30 लाख रुपये पार्षद निधि निर्धारित करने की मांग रखी। इसी बीच संयुक्त आयुक्त प्रशांत सरकैक ने कहा कि पहले पार्षद निधि होती थी लेकिन बाद में इसे बंद करना पड़ा था।

पार्षद किन किन कामों पर ये पैसा खर्च कर सकता है, ये तय न होने से इसे खत्म किया गया था। इसके बाद सदन ने तय किया कि पहले एफसीपीसी के तहत मामला जाएगा और पहले इसके लिए गाइडलाइन बनाई जाएंगी। इसके बाद पार्षदों को निगम की ओर से पैसा जारी किया जाएगा। 

ई-गवर्नेंस प्रोजेक्ट को 22 मॉड्यूल में बांटा
सदन में निगम के ई-गर्वनेंस प्रोजेक्ट को भी मंजूरी मिल गई। इस प्रोजेक्ट को 22 मॉड्यूल में बांटा गया है। इनमें से 8 को प्रदेश का आईटी विभाग तैयार करेगा जबकि बाकी 14 को प्राइवेट एजेंसी निकसी को सौंपा जा रहा है। हालांकि अभी इस प्रोजेक्ट को पूरा होने में समय लगेगा। 

निकसी अभी निगम के प्रस्ताव को देखेगी जिसके बाद इसे तैयार करने के लिए पैसा तय करेगी। इसके बाद सदन तय करेगा कि क्या निकासी से ही यह मॉड्यूल बनाने है या नहीं। वहीं, ऑनलाइन नक्शे संबंधी प्रस्ताव फिर लटक गया। इस पर यूडी विभाग को सदन में प्रेजेंटेशन देनी थी लेकिन विभाग से कोई भी अधिकारी नहीं पहुंचा। अब अगले सदन में इस पर चर्चा की जाएगी।
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