हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह व उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह आय से अधिक संपत्ति मामले में विशेष सीबीआई कोर्ट में पेश हुए। इनके साथ सात अन्य आरोपी भी पेश हुए।
पटियाला हाउस स्थित विशेष सीबीआई जज वीरेंद्र कुमार गोयल के समक्ष सभी नौ आरोपियों ने चार्जशीट के साथ कोर्ट में पेश दस्तावेज की कॉपी दिलवाने का आग्रह किया।
अदालत ने सुनवाई के बाद सीबीआई को दस्तावेज की प्रति आरोपियों को देने का निर्देश दिया है। सीबीआई ने इसके लिए एक माह का समय मांगा है। अदालत ने अगली सुनवाई 30 अगस्त तय की है।
कोर्ट ने सीबीआई की चार्जशीट पर संज्ञान लेने के बाद आठ मई को वीरभद्र सिंह, प्रतिभा सिंह, एलआईसी एजेंट आनंद चौहान उनके सहयोगी चुन्नी लाल, जोगिंद्र सिंह घट्टा, प्रेमराज, लवन कुमार रोच, वाकामुल्ला चंद्रशेखर व रामप्रकाश भाटिया को बतौर आरोपी समन जारी किया था।
ये है पूरा मामला
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह, प्रतिभा सिंह समेत अन्य आरोपियों ने 22 मई को कोर्ट में पेश होकर जमानत के लिए अर्जी दायर की थी। अदालत ने सभी नौ आरोपियों को 29 मई 2017 को एक-एक लाख रुपये के निजी मुचलके व इतनी ही राशि के जमानत की शर्त पर जमानत प्रदान की थी।
सीबीआई ने इन सभी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं 109, 465, 471 और भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धारा 13(2), उपधारा 13(1)(ई) के प्रावधानों के तहत 500 पन्नों की चार्जशीट तीन अप्रैल 2017 को दाखिल की थी। एजेंसी ने चार्जशीट में 225 गवाहों व 442 दस्तावेज का हवाला दिया है।
सीबीआई ने 23 सितंबर 2016 को वीरभद्र सिंह, उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह, एलआईसी एजेंट आनंद चौहान और एक सहयोगी चुन्नी लाल के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था।
सीबीआई ने आरोप पत्र में तर्क रखा है कि वीरभद्र सिंह 28 मई 2009 से 18 जनवरी 2011 और 19 जनवरी 2011 से 26 जून 2012 के दौरान केंद्र सरकार में बतौर मंत्री थे। सीबीआई के अनुसार अपने कार्यकाल के दौरान वीरभद्र ने 6.03 करोड़ रुपये की संपत्ति कथित तौर पर आय से अधिक अर्जित की थी।