शिमला से कांगड़ा के मटौर के लिए फोरलेन बनाने की कवायद शुरू हो गई है। नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) ने इसके लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं। फोरलेन की डीपीआर के लिए एनएचएआई 8 करोड़ का बजट खर्च कर रहा है। डीपीआर बनाने का काम आईसीटी (इंटरनेशल कॉन्टीनेंटल टेक्नोक्रिएट) कंपनी को दिया है।
बताया जा रहा है कि 7 महीने के भीतर डीपीआर बनाने का काम पूरा कर लिया जाएगा। यह फोरलेन करीब 223 किलोमीटर लंबी होगी। इसकी चौड़ाई लगभग 45 मीटर होगी। डीपीआर बनाने के लिए कंपनी के सात लोगों की टीम ने सर्वे शुरू कर लिया है।
शिमला से मटौर के बीच तीन कैमरे फिट किए गए हैं। यह मौजूदा सड़क की स्थिति का जायजा ले रहे हैं। देखा जा रहा है कि मौजूदा रोड में कितना ट्रैफिक रहता है और किन स्थानों से फोरलेन बनाने की गुंजाइश है।
सात माह में तैयार होगी डीपीआर : पुरी
एनएचएआई प्रोजेक्ट डायरेक्टर कर्नल आरएस पुरी ने बताया कि 7 महीने में डीपीआर बनाने का काम पूरा हो जाएगा। इसके तुरंत बाद फोरलेन के उपयोग में आने वाली भूमि का अधिग्रहण शुरू कर लिया जाएगा। उम्मीद है कि अगले साल से निर्माण कार्य शुरू कर लिया जाएगा।
कितने गांव और शहर प्रभावित होंगे, सर्वे से चलेगा पता
डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट में तय किया जाएगा कि फोरलेन का रूट क्या होगा और रूट में किन जगहों पर पुल बनेंगे। फोरलेन में कितने पेड़ों का कटान होगा और किन जगहों पर सुरंगें बनाई जाएंगी। इस फोरलेन से कितने गांव और शहर प्रभावित होंगे, इसका भी पूरा सर्वे किया जाना है। आधुनिक तकनीक से मिट्टी की जांच भी की जाएगी।
फोरलेन बनने से लगेंगे पर्यटन को पंख
शिमला-मटौर फोरलेन बन जाने से हिमाचल पर्यटन को पंख लगेंगे। बेहद कम समय में शिमला से धर्मशाला का सफर तय किया जा सकेगा। सर्पीली सड़कों में लगने वाले हिचकोलों से राहत मिलेगी और सफर आरामदायक होगा।