हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि पांच जून 2025 को याचिका पर नोटिस केवल इसी सीमित पहलू पर जारी किया गया था कि क्या एकल पीठ की ओर से मामले की जांच सीबीआई को सौंपने के दौरान की गई टिप्पणियों से अधिकारी का करियर प्रभावित हो सकता है।अदालत ने अपने आदेश में कहा कि जब राज्य सरकार ने अधिकारी को पदोन्नत कर दिया है, तो यह स्पष्ट है कि विवादित फैसले की टिप्पणियों को सरकार ने अधिकारी के खिलाफ नहीं माना। इसके चलते यह याचिका अप्रासंगिक हो जाती है। यह मामला एकल पीठ की ओर से मृतक चीफ इंजीनियर विमल नेगी की मौत के मामले की जांच सीबीआई को सौंपे जाने और उसके दौरान गठित एसआईटी के प्रमुख रहे संजीव कुमार गांधी पर की गई टिप्पणियों से संबंधित था।