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Shimla: रामपाल के अनुयायियों पर दर्ज FIR बरकरार, हिंदू देवी-देवताओं के बारे में बांट रहे थे आपत्तिजनक किताबें

Sun, 19 Jul 2026 03:37 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, शिमला

सार

कोर्ट ने साफ किया कि धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाले मामलों में प्रथमदृष्टया अपराध बनता है। साथ ही कहा कि संविधान के तहत मिलने वाली अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार असीमित नहीं है, बल्कि यह लोक व्यवस्था के दायरे में आता है।
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कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अपराध का संज्ञान लेना अधिकार क्षेत्र से बाहर था। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने रामपाल के 13 अनुयायियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने से इन्कार कर दिया। इन लोगों पर हिंदू देवी-देवताओं और संतों के बारे में रामपाल की आपत्तिजनक सामग्री वाली किताबें बांटने का आरोप है। कोर्ट ने साफ किया कि धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाले मामलों में प्रथमदृष्टया अपराध बनता है। साथ ही कहा कि संविधान के तहत मिलने वाली अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार असीमित नहीं है, बल्कि यह लोक व्यवस्था के दायरे में आता है।

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हालांकि, जस्टिस राकेश कैंथला ने सोलन की नालागढ़ अदालत में उनके खिलाफ चल रही कार्यवाही को रद्द कर दिया। इसकी वजह धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के इरादे से जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण काम करने की धाराओं के तहत मुकदमा चलाने की मंजूरी सक्षम अधिकारी से नहीं लेना है।

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अपराध का संज्ञान लेना अधिकार क्षेत्र से बाहर था। अभियोजन पक्ष मंजूरी मिलने के बाद नई कार्यवाही शुरू करने के लिए स्वतंत्र होगा। कोर्ट ने कहा कि यदि कानून के तहत ऐसा करना जायज हो, तो मंजूरी मिलने के बाद राज्य को नई कार्यवाही शुरू करने से यह आदेश नहीं रोकेगा। 

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