1. ग्रीन एरिया
राजधानी में चिन्हित किए 17 ग्रीन क्षेत्रों में भी अब भवन निर्माण की मंजूरी मिलेगी। अभी यहां पाबंदी लगी है। लोग एक मंजिल के साथ रिहायशी एटिक का निर्माण कर सकते हैं। इस क्षेत्र में निर्माण की शर्तें सबसे सख्त रहेंगी। पेड़ काटकर निर्माण की अनुमति नहीं मिलेगी। खाली जमीन पर ही भवन निर्माण की मंजूरी दी जाएगी। ग्रीन एरिया में सिर्फ रिहायशी भवन बन पाएंगे। व्यावसायिक निर्माण की छूट नहीं मिलेगी। ग्रीन क्षेत्र के लिए मंजिलें कम रखी हैं, लेकिन फ्लोर एरिया का अनुपात 1.75 की बजाय एक रखा है।
2. कोर एरिया
शहर के कोर एरिया में सर्कुलर रोड से ऊपर के क्षेत्र को शामिल किया है। ग्रीन एरिया की तरह कोर एरिया में भी अभी भवन निर्माण पर पाबंदी लगी है। प्लान लागू होते ही इस क्षेत्र में रिहायशी और व्यावसायिक दोनों तरह के भवन निर्माण के लिए दो मंजिलों के साथ पार्किंग फ्लोर और एटिक के निर्माण की छूट मिलेगी। इस एटिक का दोनों तरह के निर्माण में रिहायश के तौर पर इस्तेमाल हो सकेगा। इस क्षेत्र में बनने वाले रिहायशी भवनों और व्यावसायिक परिसरों की अधिकतम ऊंचाई 13 मीटर रहेगी।
नॉन कोर एरिया
शहर के सर्कुलर रोड से बाहर के क्षेत्र को नॉन कोर एरिया माना गया है। इसमें अभी ढाई मंजिला भवन निर्माण की छूट है। अब नया प्लान लागू होने से इस एरिया के लोग तीन मंजिला रिहायशी भवन बना सकेंगे। इसके अलावा पार्किंग फ्लोर अलग बना सकेंगे। पार्किंग के साथ रिहायश के लिए एटिक भी बन सकेगी। रिहायशी भवन की अधिकतम ऊंचाई 16.50 मीटर रहेगी। व्यावसायिक भवनों में चार मंजिलें बनाने की छूट रहेगी। पार्किंग फ्लोर और एटिक की भी सुविधा मिलेगी। अधिकतम ऊंचाई 21 मीटर रहेगी।
जाठियादेवी में बनेगा काउंटर मेगनेट टाउन
सिटी डेवलपमेंट प्लान में शिमला शहर की बढ़ती आबादी को लेकर भी कई प्रावधान किए गए हैं। जाठियादेवी में करीब एक लाख की आबादी वाला नया शहर बसाने की योजना है। इस काउंटर मेगनेट टाउन को बसाने का मकसद शहर से बढ़ती आबादी का बोझ कम करना है। इसके अलावा फागू, नालदेहरा, घंडल और चमयाणा में सैटेलाइट टाउन बनाए जाएंगे। इनमें आठ से दस हजार की आबादी को बसाने की योजना है। मुख्य शहर और नए कस्बों में यातायात को लेकर बाईपास रोड तैयार होंगे। शहर में रोपवे आधारित यातायात व्यवस्था को बढ़ावा दिया जाएगा। रोपवे अथारिटी इसके लिए शहर में रोपवे का जाल बिछाने के काम पर काम भी कर रही है। नया प्लान अगले 20 साल यानि साल 2041 तक की जरूरतों को देखते हुए तैयार किया है।
राजधानी में लागू होने वाले नए डेवलपमेंट प्लान की सबसे खास बात यह है कि पहली बार एटिक को रिहायश के तौर पर इस्तेमाल करने की मंजूरी दी जाएगी। अभी इसकी मंजूरी नहीं मिलती है। रिहायश की सुविधा देने के लिए एटिक की ऊंचाई बढ़ाने का भी प्रावधान किया है। टीसीपी के अनुसार नए भवनों में एटिक की ऊंचाई 2.75 की जगह तीन मीटर करने को छूट दी जाएगी। इसे रिहायश के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकेगा। शहर के कोर और नॉन कोर एरिया में भवन निर्माण के लिए सेटबैक के नए नियम भी लागू होंगे। इसके अनुसार 150 से 250 वर्ग मीटर जमीन पर बनने वाले भवनों के आगे दो मीटर, किनारों पर 1.5 मीटर जबकि पीछे 1.5 मीटर का सेटबैक छोड़ना होगा।
ग्रीन एरिया में लागू होंगी यह शर्तें
शहर में चिन्हित 17 ग्रीन क्षेत्रों में भी बना सकेंगे भवन
ग्रीन एरिया में बनेंगे सिर्फ रिहायशी भवन, चेंज ऑफ लैंड यूज की नहीं मिलेगी मंजूरी
भवन निर्माण के लिए पहाड़ी की 3.50 मीटर तक ही कर पाएंगे खुदाई
हरे पड़े से दो मीटर जबकि वन क्षेत्र से पांच मीटर की दूरी पर ही निर्माण को मिलेगी मंजूरी
इस क्षेत्र के भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था करनी होगी
पुराने भवनों के मालिक ओल्ड लाइन पर बना सकेंगे भवन