सीटीओ में प्रदर्शन के दौरान सैकड़ों कर्मचारी और नागरिक सभा के पदाधिकारियों ने सुबह 10:30 बजे से ही जोरदार प्रदर्शन शुरू कर दिया था। कई महिला कर्मी अपने छोटे बच्चों को भी साथ लेकर आईं थीं। इस दौरान लोअर बाजार की ओर से नगर निगम एक गाड़ी आई लेकिन हड़ताल पर बैठे कर्मचारियों ने उसे रास्ता देने से इन्कार कर दिया। इस स्थिति को देखते हुए पुलिस ने चालक से बातचीत की और फिर उसे यहां से वापस भेज दिया।
हड़ताल पर गए सैहब कर्मचारियों की मांगें पूरी करने के लिए नगर निगम प्रशासन ने सरकार को पत्र लिखा है। इसमें तुरंत एजीएम बुलाने की मांग की है। शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में कर्मचारियों की वेतन से जुड़ी मांग पर चर्चा की जाएगी। इसमें वेतन बढ़ाने पर रोक लगाने को लेकर लिए पिछले फैसले को पलटा जा सकता है। पिछले महीने हुई एजीएम में कर्मचारियों की सालाना 10 फीसदी वेतन वृद्धि पर रोक लगा दी थी। इसके विरोध में सभी कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। निगम प्रशासन का कहना है कि आचार संहिता खत्म होते ही विशेष एजीएम बुलाई जाएगी।
कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष जसवंत सिंह ने कहा कि निगम प्रशासन की चेतावनी का कर्मचारियों पर असर नहीं होगा। दबाव में कर्मचारी झुकने वाले नहीं है। नगर निगम प्रशासन यदि हमारी सेवाएं खत्म करना चाहता है तो वह कर सकता है लेकिन कर्मचारी अपनी मांगों पर अड़े रहेंगे। अब दोबारा सोमवार को कर्मचारी उपायुक्त कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करेंगे। घरों से कूड़ा उठाने का काम अभी ठप रहेगा। निगम हमारी मांग पूरी करे, कर्मचारी काम पर लौट जाएंगे।
नगर निगम के महापौर सुरेंद्र चौहान ने कर्मचारियों से अपील की कि वह काम पर लौट आएं। शहर में स्वच्छता सर्वेक्षण चल रहा है। इसके अलावा कूड़ा न उठने से आम जनता भी परेशान हो रही है। 10 साल में पहली बार नगर निगम ने कर्मचारियों की मांगों पर एजीएम बुलाई है। 7 दिन की छुट्टी, बीमा कवर जैसे अहम फैसले लिए हैं। आउटसोर्स कर्मचारियों को सैहब में मर्ज किया जा रहा है। यह सारी मांगे हमने पूरी की हैं। वेतन बढ़ाने को लेकर भी जो मांग है, उस पर भी जल्द फैसला लिया जाएगा।
महापौर ने कहा कि उन्होंने सुबह के समय खुद छोटा शिमला और साथ लगते वार्डों में जाकर कलेक्शन सेंटर से कूड़ा उठवाया। नगर निगम के चालक जो शुक्रवार को हड़ताल पर थे वह शनिवार सुबह से काम पर लौट आए हैं। चालक यूनियन ने अपनी हड़ताल वापस लेते हुए काम शुरू कर दिया है। निगम का दावा है कि अब पूरे शहर से कूड़ा उठाया जा रहा है। मेयर ने कहा कि कलेक्शन सेंटर से कूड़ा उठाने के लिए कुछ अन्य वाहन भी किराये पर लेने की योजना बनाई है। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया की जा रही है।
एस्मा लागू होने के बावजूद दो दिनों से हड़ताल पर डटे सैहब कर्मचारियों पर अब एक्ट के तहत कार्रवाई करने की तैयारी शुरू कर दी है। उपायुक्त शिमला ने एसएसपी शिमला और एसडीएम शिमला को इस संबंध में नियमों के तहत कार्रवाई करने के लिए कहा है। नगर निगम आयुक्त को पुलिस और प्रशासन को इस संबंध में संबंधित रिकॉर्ड उपलब्ध करवाना होगा। ऐसे अब 800 के करीब कर्मचारियों पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है। आवश्यक सेवा रखरखाव अधिनियम 1968 के तहत अगर कोई कर्मचारी एस्मा लागू होने के बावजूद हड़ताल पर जाता है या हड़ताल को भड़काता है तो पुलिस बिना किसी वारंट के उन्हें गिरफ्तार कर सकती है। नियम तोड़ने वाले कर्मचारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई, नौकरी से बर्खास्तगी, कारावास और जुर्माने की सजा का भी प्रावधान है। नगर निगम की ओर से दो बार कर्मचारियों को चेतावनी जारी करके हड़ताल को खत्म करने के निर्देश दिए जा चुके हैं। इसके बावजूद सैहब कर्मी अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर डटे हुए हैं। उपायुक्त अनुपम कश्यप ने बताया कि एस्मा अधिनियम के तहत एसएसपी शिमला और एसडीएम को नियमों के अनुसार कार्रवाई करने के लिए कहा है। नगर निगम आयुक्त ने इस संबंध में स्थिति से अवगत करवाया था। इसके बाद अधिनियम के तहत कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।