राजधानी शिमला में बच्चों की जान से सरेआम खिलवाड़ हो रहा है। बच्चों की सुरक्षा के लिए बने तमाम कायदे कानूनों की हर रोज शहर की सड़कों पर खिल्ली उड़ाई जा रही है। सोमवार को बसंतपुर के पास बस की चपेट में आने से हुई छात्रा की मौत ने शहर की सड़कों का इस्तेमाल करने वाले बच्चों की सुरक्षा पर सवालिया निशान लगा दिया है। शहर की सड़कों पर रोड सेफ्टी के नाम पर कोई इंतजाम नहीं है।
राजधानी शिमला में रोड सेफ्टी सचिवालय और विधानसभा तक ही सीमित है। अन्य क्षेत्रों में रस्म अदायगी के लिए साल में एक बार सड़कों पर सफेद लकीरें (जेबरा क्रासिंग) खींची जाती हैं। मिट जाएं तो दोबारा तकलीफ नहीं उठाई जाती। स्कूलों के आसपास वाहनों की रफ्तार पर लगाम लगाने के लिए स्पीड ब्रेकर नहीं हैं। बच्चे फुटपाथ का इस्तेमाल नहीं कर सकते क्योंकि आधे शहर में फुटपाथ है ही नहीं, और जहां है वहां इन पर तहबाजारियों ने कब्जा कर रखा है।
स्कूलों के आसपास चेतावनी बोर्डों से चेतावनी गायब हैं, इनका सदुपयोग कोचिंग सेंटरों के विज्ञापनों के लिए हो रहा है। बच्चों की सुरक्षा के लिए स्कूलों के आसपास चाइल्ड जोन चिन्हित करने के बारे में तो कभी सोचा ही नहीं गया। शहर की सड़कों पर जाम अब आम हो गया है। सड़कें गाड़ियों से भरी रहती हैं और बच्चों को सड़क क्रास करने के लिए गाड़ियों के जगह तलाशनी पड़ती है।
बच्चों की सुरक्षा को लेकर सरकारी तंत्र कितना संजीदा है इसका अंदाजा स्कूल टाइम में स्कूल बसों और टैक्सियों में भेड़ बकरियों की तरह भरे गए बच्चों को दिख कर लगाया जा सकता है। संजौली बाईपास के पास लोगों की सुविधा के लिए मुख्यमंत्री ने ओवर हेड ब्रिज तैयार करने की घोषणा की थी। दावा किया गया था कि एक साल के भीतर ब्रिज बन कर तैयार होगा। कई साल बीत गए लेकिन अभी तक घोषणा कागजों में कैद है।
शुरू नहीं हुआ ओवर हेड ब्रिज का काम
विक्ट्री
टनल के पास प्रस्तावित ओवर हेड ब्रिज का काम शुरू नहीं हो पा रहा। पिछले
कई महीनों से प्रक्रिया कागजों में चल रही है। दो बार सैलानी यहां वाहनों
की चपेट में आने से बाल बाल बचे हैं। ओवरहेड ब्रिज होने से स्कूली बच्चों
को सड़कें पार करने में आसानी होगी तथा हादसे भी कम होंगे।
जल्द शुरू होगा काम : चौधरी
एजी आफिस के पास ओवर हेड ब्रिज का काम
अवार्ड हो चुका है, जल्द काम शुरू होने वाला है। ढली-संजौली बाईपास पर बजट
के लिए प्रपोजल सरकार को भेज दिया गया है। मंजूरी मिलते ही काम शुरू कर
दिया जाएगा।
- अयूब चौधरी अधिशासी अभियंता लोक निर्माण विभाग